पहले चरण में नक्सल प्रभावित आठ जिलों की 18 सीटों पर 70 फीसदी से ज्यादा मतदान ने साबित कर दिया कि बैलेट की ताकत बुलेट पर भारी पड़ी। नक्सलियों की धमकी का लोगों पर कोई असर नहीं दिखा और सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें लगने लगी थीं। बस्तर की सात और राजनांदगांव की एक सीट पर सुबह 7 से दोपहर 3 बजे तक और बाकी आठ सीटों पर सुबह 8 से शाम 5 बजे तक वोटिंग हुई। शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए एक लाख जवानों को तैनात किया गया था।
सुकमा के पालाम अडगु गांव में 15 वर्ष में पहली बार लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया। जिले के पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने बताया कि कोंटा विधानसभा क्षेत्र के सेंदुरगुडा में 2013 में केवल पांच लोगाें ने वोट दिया था। इस बार 300 से ज्यादा लोगों ने वोट डाला। वहीं, पिछली बार जहां भेज्जी-2 और गोरखा मतदान केंद्र में एक भी व्यक्ति ने वोट नहीं दिया था, इस बार वहां भी लोगों ने मतदान किया।