छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान सरकारी मोबाइल फोन वितरण योजना को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया है। पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने प्रदेश में संचार क्रांति योजना के तहत मोबाइल फोन वितरण की शुरुआत की थी। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट करार दिया था।
राजधानी रायपुर में आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल ने जिलों में सरकारी मोबाइल फोन वितरण को अगली सूचना तक स्थगित रखने का निर्देश दिया है और कहा है कि इस बारे में शासन स्तर पर बाद में उचित फैसला लिया जाएगा।
रमन सिंह ने राज्य में संचार क्रांति योजना की शुरूआत की थी। इस योजना के तहत 50 लाख परिवारों की महिलाओं और छात्रों को मुफ्त मोबाइल फोन वितरित करना था। राज्य में हुए चुनाव से पहले लगभग 30 लाख परिवारों को मोबाइल फोन का वितरण कर दिया गया था।
भाजपा को फैसला अनुचित लगा
इधर भारतीय जनता पार्टी के विधायक शिवरतन शर्मा ने बघेल सरकार के फैसले पर कहा है कि छत्तीसगढ़ के गांवों में कई ऐसे भी लोग हैं जिनके पास मोबाइल नहीं है और उन्हें जानकारी नहीं मिल पाती है। इसे ध्यान में रखकर भाजपा सरकार ने इस योजना की शुरुआत की थी। 70 से 80 फीसदी लोगों को इस योजना के तहत मोबाइल का वितरण हो गया है। मोबाइल वितरण के कार्य को स्थगित करना सरकार का उचित निर्णय नहीं है।
'जन घोषणा पत्र के मुताबिक काम करें अधिकारी'
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार शाम मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों की बैठक ली।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान अधिकारियों को जन घोषणा पत्र के सभी बिंदुओं पर विभागवार क्रियान्वयन की कारवाई तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया। बघेल ने जिला कलेक्टरों से कहा कि शपथ ग्रहण के तुरंत बाद राज्य शासन ने किसानों को धान पर 2500 रूपये प्रति क्विंटल की राशि देने और कृषि ऋण माफी का निर्णय लिया है। इस संबंध में जिला स्तर पर सभी जरूरी जानकारी भी तैयार रखें।
उन्होंने बताया कि इस दौरान मंत्री टी. एस. सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू, मुख्य सचिव अजय सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।