मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (फाइल फोटो)
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आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने छत्तीसगढ़ में जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर बड़े आंदोलन की घोषणा की है। रायपुर में आदिवासी कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी और जिलाध्यक्षों की बैठक के बाद विक्रांत भूरिया ने दावा किया कि राज्य में जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में आदिवासियों से उनके सांविधानिक और प्राकृतिक अधिकार छीने जा रहे हैं, जिसके खिलाफ पार्टी अब व्यापक स्तर पर संघर्ष की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के दावे को राजनीतिक पैंतरेबाजी बताया।
आदिवासी कांग्रेस के पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों की बैठक में आदिवासी क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और समाज के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन की रूपरेखा तथा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया। विक्रांत भूरिया ने कहा कि जल, जंगल और जमीन का विषय आदिवासी समाज के अस्तित्व से सीधे जुड़ा हुआ है। आदिवासियों के अधिकारों की इस लड़ाई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी स्वयं शामिल होकर आंदोलन की अगुआई करेंगे। कांग्रेस लगातार आदिवासियों की आवाज उठाती रहेगी।
कांग्रेस की घोषणा और बैठक पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कांग्रेस ने अपने लंबे शासनकाल के दौरान कभी भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में अनुसूचित जनजाति मंत्रालय की स्थापना की गई थी। वर्तमान में देश के सर्वोच्च पद पर द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति के रूप में आसीन हैं, जो भारतीय जनता पार्टी की आदिवासी कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भाजपा सरकारों ने आदिवासी वर्ग के उत्थान के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं और उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि जिस दल ने अपने कार्यकाल में आदिवासियों के हितों को कभी प्राथमिकता में शामिल नहीं किया, उसका आज आदिवासी अधिकारों की बात करना केवल राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। साय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए आदिवासी मुद्दों को उठाने का ढोंग कर रही है।