पत्रवार्ता लेते बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष और चुनाव प्रबंधन समिति प्रदेश संयोजक शिवरतन शर्मा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
Lok Sabha Elections 2024: बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष और चुनाव प्रबंधन समिति प्रदेश संयोजक शिवरतन शर्मा ने कांग्रेस को घोषणा पत्र को लेकर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का घोषणा पत्र लोगों का हक छीनने वाला और धोखा देने वाला है। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में सरकारी ठेकों में अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता देने की बात कहकर साफ कर दिया है कि कांग्रेस आदिवासियों ओबीसी और अनुसूचित जाति सहित सामान्य वर्ग के हक को छीनना चाहती है।
भाजपा चुनाव प्रबंधन समिति के प्रदेश संयोजक शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस न केवल एससी/एसटी/ओबीसी की संपत्ति पर कब्जा करना चाहती है। सोना और उनके मंगलसूत्र सहित हिंदू महिलाओं की छोटी बचत को अपने कब्जे में लेना चाहती है। इसे अल्पसंख्यकों के बीच वितरित करना चाहती है। कांग्रेस यह कैसा भारत बनाना चाहती है? श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में भी यह भी लिखा है कि अल्पसंख्यकों का आर्थिक विकास बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने साफ शब्दों में कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों, उनमें भी मुसलमानों का है।
रविवार को भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में शर्मा ने कहा कि सम्पत्ति का सर्वे कर सम्पत्ति को बांट देने और फिर राहुल गांधी के सलाहकार सैम पित्रोदा के विरासत-टैक्स का राग आलापने के बाद अब सरकारी ठेकों तक में अल्पसंख्यकों को धर्म के आधार पर शेयर देने की बात से कांग्रेस का आदिवासी, ओबीसी और अजा विरोधी चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो गया है।
भाजपा चुनाव प्रबंधन समिति के प्रदेश संयोजक ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में तुष्टिकरण के तहत किए प्रावधानों से देशवासियों में भारी आक्रोश है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में लिखी कई आपत्तिजनक बातो में एक और आपत्तिजनक बात सामने आ रही है। उसमे लिखा है - "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अल्पसंख्यकों को शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, सार्वजनिक रोजगार, सार्वजनिक कार्य अनुबंध, कौशल विकास, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में बिना किसी भेदभाव के अवसरों का उचित हिस्सा मिले।" श्री शर्मा ने सवाल किया कि कांग्रेस यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि अल्पसंख्यकों (मुस्लिम पढ़ें) को 'सार्वजनिक कार्य अनुबंध' में उचित हिस्सा मिले? क्या तकनीकी और वित्तीय बोली के साथ धार्मिक कोटा भी होगा? क्या मुस्लिमों के पक्ष में योग्य बोलीदाताओं, जो कि अन्य धर्मों से रहेंगे की अनदेखी की जाएगी? क्या सार्वजनिक अनुबंध हासिल करने के लिए हिंदुओं को अल्पसंख्यकों के अधीन बनना होगा। भले ही वे स्वयं ऐसा करने में सक्षम हों? क्या कांग्रेस यह कहकर 'टेंडर घोटाला' की नींव नहीं रख रही है?