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छत्तीसगढ़: 11 सूत्री मांगों को लेकर 33 जिलों में भारतीय किसान संघ का प्रदर्शन

Thu, 08 Oct 2026 03:26 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

33 जिलों में भारतीय किसान संघ के आह्वान पर किसानों ने 11 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। ट्रैक्टर रैलियों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय किसान संघ के आह्वान पर छतीसगढ़ के सभी 33 जिलों में किसान अपनी विविध मांगों को लेकर जिला मुख्यालयों पर व्यापक आंदोलन कर रहे हैं। संगठन के कार्यकर्ता और किसान बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के साथ रैलियां निकालते हुए जिला मुख्यालयों तक पहुंच रहे हैं। जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने के बाद किसान मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को अपना 11 सूत्री ज्ञापन सौंपेंगे। किसान संगठन मुख्य रूप से धान खरीद, बकाया राशि भुगतान, समर्थन मूल्य, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, गन्ने के मूल्य और भूमि अधिग्रहण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
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बकाया भुगतान और धान खरीद की मांग
इस व्यापक प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान संघ ने वर्ष 2022-23 की लंबित लगभग 1,700 करोड़ रुपये की बकाया राशि का अविलंब भुगतान करने की मांग रखी है। इसके अतिरिक्त, संघ चाहता है कि केंद्र सरकार के समर्थन मूल्य के ऊपर राज्य सरकार की ओर से धान उत्पादक किसानों को प्रति एकड़ 800 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाए। किसान प्रतिनिधियों ने धान खरीद की पूरी अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक तय करने, खरीद केंद्रों की बुनियादी व्यवस्थाएं बेहतर करने तथा टोकन जारी करने की प्रणाली में सुधार करने पर विशेष जोर दिया है।

गन्ने का मूल्य और अन्य लंबित मुद्दे
आंदोलनकारी किसानों ने गन्ने के दाम में 150 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने तथा प्रदेश में अधूरी पड़ी सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जल्द पूरा करने का आग्रह किया है। खेती-किसानी के लिए बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु अघोषित बिजली कटौती रोकने की मांग भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल की गई है। इसके साथ ही संघ ने फसल बेचने की व्यवस्था को सुगम बनाने, एग्रीस्टैक पंजीयन प्रक्रिया को आसान करने और भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों के हितों को सुरक्षित रखने का मुद्दा उठाया है। किसान संगठन ने सरकार से अपनी तमाम अन्य लंबित समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की है।
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