दुर्ग में जन्में 57 वर्षीय भूपेश बघेल कुर्मी क्षत्रिय (ओबीसी) और किसान परिवार से हैं। बघेल ने राज्य में कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में डेढ़ दशक तक लंबा सफर तय किया है। इस दौरान लगातार तीन चुनावों में भाजपा के हाथों शिकस्त झेलने, सुकमा में नक्सली हमले में प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने, राज्य की पहली कांग्रेस सरकार में सीएम रहे अजीत जोगी के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार हताशा से घिरे हुए थे लेकिन भूपेश बघेल नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के साथ उनका मनोबल बढ़ाने में जुटे रहे। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने रिकॉर्ड सीटें हासिल की हैं।
युवक कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद तक :
भूपेश बघेल ने 80 के दशक में कांग्रेस से ही राजनीतिक सफर शुरू किया था। वे मध्य प्रदेश के विभाजन से पहले दुर्ग युवक कांग्रेस (ग्रामीण) के अध्यक्ष और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के निदेशक रहे। वे 1993 और 1998 में विधायक चुने गए थे। छत्तीसगढ़ बनने पर केबिनेट मंत्री बने और 2003 में पाटन सीट से चुनाव जीते। कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने पर विपक्ष के उपनेता बने। वे 2008 में चुनाव हार गए थे लेकिन 2013 में फिर विजयी हुए। उसी वर्ष झीरम घाटी नक्सली हमले में शीर्ष कांग्रेसी नेताओं के खत्म होने पर 2014 में उन्हें प्रदेश संगठन की कमान सौंपी गई। तब से वे प्रदेश अध्यक्ष हैं।