छत्तीसगढ़ में सियासी सरगर्मियां तेज हैं। राजनीति हर रोज नए करवट लेती नजर आ रही है। 20 नवंबर को छत्तीसगढ़ के 19 जिलों की 72 सीटों पर मतदान होना है। सैकड़ों उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इन सबके बीच दिलचस्प तथ्य सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला भाजपा के पितृ पुरुष कहे जाने वाले लखीराम अग्रवाल से जुड़ा हुआ है। वह चुनावी मैदान में तो कई बार उतरे मगर जीत का स्वाद नहीं चख सके।
उन्होंने कई चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई मगर हर बार उन्हें हार ही मिली। उन्होंने अपना पहला चुनाव धरमजयगढ़ 1962 में लड़ा था जिसमें उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी मोहन त्रिपाठी से बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। उन्हें महज 2962 वोट ही मिले। 1977 में उन्होंने सरिया सीट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस उम्मीदवार नरेश चंद्र से हारे। फिर 1990 में खरसिया से चुनावी मैदान में खड़े हुए इस बार कांग्रेस के नंदकुमार पटेल ने 3893 वोटों से हराया। चुनावी समर में हर बार कांग्रेस के उम्मीदवार ने ही जीत हासिल की।
पिता की जीत की कसर को बेटे अमर अग्रवाल ने पूरा किया और बिलासपुर सीट से लगातार चार बार जीते। पिता जहां जीत को तरस गए वहीं बेटा हर चुनाव में जीत के आकड़े को बढ़ाता चला गया। पिछले विधानसभा चुनाव में अमर अग्रवाल ने 15 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। वह पांचवीं बार चुनावी मैदान में हैं।
बता दें कि 12 नवंबर को पहले चरण में नक्सल प्रभावित 18 सीटों पर मतदान हुआ था। जिसमें मतदान प्रतिशत 76 फीसदी दर्ज किया गया था। छत्तीसगढ़ में जहां एक ओर भाजपा चौथी बार सत्ता में वापसी चाहती है वहीं कांग्रेस भी अपना वनवास खत्म करने के लिए पूरा जोर लगा रही है।
राज्य में 20 नवंबर को मतदान है और चुनाव परिणाम 11 दिसंबर को आएंगे।