छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने अलग-अलग स्थानों पर छापे मारकर एक महिला पटवारी समेत तीन सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा।
एसीबी के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि बिलासपुर, अंबिकापुर और रायपुर की टीमों ने रिश्वत लेते हुए तीन लोगों को पकड़ा है। अधिकारियों ने बताया कि बिलासपुर जिले के भदौरा ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि विजय कुमार राजगीर (50 वर्ष) ने एसीबी में शिकायत की थी कि केन्द्र सरकार की योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत भदौरा में विभिन्न कार्यों के लिए स्वीकृत लगभग 14 लाख रुपये में से प्रथम किस्त जारी करने के एवज में समन्वयक नवीन कुमार देवांगन ने पांच प्रतिशत यानी 35 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
उन्होंने बताया कि राजगीर की शिकायत के बाद एसीबी ने मंगलवार को देवांगन को प्रार्थी से 35 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि सूरजपुर जिले में स्थित रेलवे कॉलोनी करंजी के पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक ओमप्रकाश योगी ने अंबिकापुर के एसीबी कार्यालय में शिकायत की थी कि लॉकडाउन अवधि का वेतन निकालने के एवज में सूरजपुर के बीईओ कपूरचंद साहू ने 30 हजार रुपये की मांग की है।
उन्होंने बताया कि ओमप्रकाश योगी की शिकायत के बाद उसे साहू के पास पैसे लेकर भेजा गया था। साहू ने पैसे लेने के दौरान पांच हजार रुपये कम लेने की सहमति दी और उसने योगी से 25 हजार रुपये प्राप्त कर लिया। बाद में एसीबी की टीम ने साहू को रंगे हाथ पकड़ लिया।
एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह बेमेतरा जिले के नवागढ़ निवासी नरेन्द्र चतुर्वेदी (28 वर्ष) ने एसीबी रायपुर में शिकायत की थी कि उसके पिता की मौत होने के बाद पिता के नाम से धारित कृषि भूमि को मां और भाई के नाम पर दर्ज करवाना था। इसके लिए अधियार खोर गांव की पटवारी लोचन साहू ने उससे 7500 रुपये रिश्वत की मांग की थी। बाद में महिला पटवारी प्रार्थी से 2800 रुपये लेने के लिए मान गई।
अधिकारियों ने बताया कि चतुर्वेदी की शिकायत के बाद एसीबी की टीम ने लोचन साहू को 2800 रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। उन्होंने बताया कि सभी मामलों की जांच की जा रही है।