छत्तीसगढ़ में दो पत्रकारों की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ पत्रकारों ने 'जेल भरो आंदोलन' शुरु किया है। ये मुद्दा सोमवार को राज्य की विधानसभा में भी उठा है।
छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा क़ानून संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले राज्य भर से पत्रकार और सामाजिक संगठनों के लोग सोमवार को बस्तर के जगदलपुर में कमीशन कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।
बस्तर के पत्रकार संतोष यादव को माओवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में अक्टूबर में गिरफ़्तार किया गया था। इससे पहले जुलाई में एक अख़बार के प्रतिनिधि सोमारु नाग को भी ऐसे ही आरोपों में गिरफ्तार किया गया।
दोनों ही के ख़िलाफ़ टाडा और पोटा से भी ख़तरनाक माने जाने वाले 'छत्तीसगढ़ विशेष जनसुरक्षा अधिनियम' के तहत कार्रवाई की गई है। दोनों फ़िलहाल जेल में हैं।
राज्य के कई पत्रकार संगठनों ने इनकी रिहाई के लिये कई बार आंदोलन चलाया लेकिन सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। पत्रकार सुरक्षा क़ानून संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक कमल शुक्ला का दावा है, "दोनों बेगुनाह हैं और पुलिस ने केवल अपने ख़िलाफ़ ख़बर लिखे जाने के कारण इन्हें निशाना बनाया है।