छत्तीसगढ़ के रायपुर में महादेव घाट स्थित हनुमान मंदिर राजनीतिक दलों का अखाड़ा बन कर रह गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जहां मंदिर तोड़ने के आदेश दिए हैं वहीं भाजपा समेत कांग्रेस ने इसका विरोध किया है।
रविवार को जब नगर निगम की टीम मंदिर तोड़ने के लिए पहुंची तो भाजपा, बजरंग दल, विहिप और शिवसेना नेताओं के नेतृत्व में काफी संख्या में पहुंचे लोगों ने इसका विरोध किया। घंटों चले हंगामे के बीच निगम की टीम को बैरंग लौटना पड़ा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश मजाक बनकर रह गए। खास बात ये है कि मंदिर विधानसभा अध्यक्ष के ट्रस्ट के नाम आवंटित भूमि पर बना है।
बता दें कि शहर के महादेव घाट पर बने मंदिर को 15 मई को दिए आदेशों में सुप्रीम कोर्ट अवैध घोषित करते हुए इसे तोड़ने के आदेश दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार के उस हलफनामे के बाद दिए थे जिसमें उसने माना था कि मंदिर और वहां बनी 19 दुकानों का निर्माण अवैध तरीके से हुआ है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए। लेकिन इस सारे विवाद में सबसे बड़ा पेंच ये बना हुआ है कि मंदिर जिस जमीन पर बना है वो विधानसभा अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल के ट्रस्अ छगन लाल गोविंद राम ट्रस्ट को लीज पर दी गई है।
मंदिर निर्माण के बाद हुई मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा में मुख्यमंत्री रमन सिंह भी शामिल हुए थे। ऐसे में उसी मंदिर को तोड़ना सरकारी अमले के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। लेकिन मजबूरी ये है कि सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर चुका है।