इन योजनाओं को पायलट प्रोजेक्ट के तहत बस्तर से लॉन्च किया जाएगा, जोकि छत्तीसगढ़ का अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। यहां पूरे राज्य भर में सबसे ज्यादा कुपोषण का प्रभाव है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह इलाका पिछड़ा हुआ है।
सीएम बघेल ने कहा कि हम कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अगले एक सप्ताह के भीतर कुछ पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया जाएगा और अगले एक महीने के अंदर पूरा जिले को इस दायरे में लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पौष्टिक भोजन आदिवासियों को स्थानीय स्तर पर मुहैया कराया जाएगा। यह उनकी इच्छा पर निर्भर करेगा कि वे पौष्टिक आहार, पंचायत के माध्यम से या फिर महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लेना चाहेंगे।
उन्होंने कहा कि बस्तर और दंतेवाड़ा के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मोबाइल पैथोलॉजी यूनिट, एक्स रे यूनिट और जरूरी दवाओं को हाट-बाजारों में उपलब्ध कराने के लिए जल्द से जल्द जरुरी कदम उठाए जाएं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह योजना आदिवासियों के जीवन स्तर में काफी हद तक सुधार लाएगी।