Famous Hindi writer Vinod Kumar Shukla last funeral: ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के प्रख्यात हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का आज मंगलवार को रायपुर एम्स में निधन हो गया। 89 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था। सांस लेने में दिक्कत के कारण उन्हें वेंटिलेटर में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था। उनका अंतिम संस्कार कल बुधवार को सुबह 11 बजे मारवाड़ी मुक्तिधाम में किया जायेगा। उनके बेटे शाश्वत शुक्ल ने बताया कि उन्हें सांस लेने में समस्या होने के कारण दो दिसंबर को रायपुर एम्स में भर्ती कराया गया था। मंगलवार की शाम 4.48 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके कई अंगों में संक्रमण हो गया था। विनोद कुमार शुक्ल के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा शाश्वत और एक बेटी हैं।
छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय उनके निधन पर विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए और शोक जताते हुए कहा कि विनोद कुमार शुक्लजी के निधन से प्रदेश को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ का गौरव देश-दुनिया में बढ़ाया। छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके अतुलनीय योगदान को समादर देते हुए उन्हें सम्पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दिए जाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल का निधन हिंदी साहित्य और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नौकर की कमीज और दीवार में एक खिड़की रहती थी जैसी कालजयी कृतियों के माध्यम से विनोद कुमार शुक्ल ने साधारण जीवन को असाधारण गरिमा प्रदान की। उनकी लेखनी में मानवीय संवेदना, सादगी और जीवन की सूक्ष्म अनुभूतियाँ अत्यंत सहजता से अभिव्यक्त होती थीं, जिसने पाठकों की अनेक पीढ़ियों को गहराई से प्रभावित किया।
सीएम ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएँ केवल साहित्य नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और जीवन-दर्शन की सजीव अभिव्यक्ति हैं। उनकी संवेदनशील दृष्टि और मौलिक भाषा-शैली सदैव पाठकों को प्रेरणा देती रहेंगी और हिंदी साहित्य में उनका योगदान अमिट रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना की कि वे इस दुःख की घड़ी में सभी को संबल प्रदान करें और पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
छत्तीसगढ़ बीजेपी ने लिखा कि महान साहित्यकार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल जी का निधन अपूरणीय क्षति है। आज पूरा छत्तीसगढ़ शोक में है। दीवार में एक खिड़की रहती थी, नौकर की कमीज जैसी अनमोल कृतियों से उनकी असाधारण लेखन प्रतिभा का ज्ञात होता है। हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे। कालजयी कृतियों के रचनाकार शुक्ल जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।