आम आदमी पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ बीजेपी का प्रदेश प्रभारी बनाए जाने पर तंज कसते हुए निशाना साधा है। छत्तीसगढ़ आप के प्रदेश प्रभारी और दिल्ली विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष मुकेश अहलावत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य की जनता बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन भाजपा संगठन चलाने के बजाय टीवी सीरियल का सेट लगाने में व्यस्त है।
आम आदमी पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ बीजेपी का प्रदेश प्रभारी बनाए जाने पर तंज कसते हुए निशाना साधा है। छत्तीसगढ़ आप के प्रदेश प्रभारी और दिल्ली विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष मुकेश अहलावत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य की जनता बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन भाजपा संगठन चलाने के बजाय टीवी सीरियल का सेट लगाने में व्यस्त है।
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मुकेश अहलावत ने कहा कि "स्मृति ईरानी की ताजपोशी के बाद अब छत्तीसगढ़ में भाजपा के भाषणों में किसी मसाले की कमी नहीं होगी, क्योंकि टीवी डिबेट का पूरा सेट ही उठाकर रायपुर में लगा दिया गया है। पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं को अब जमीनी काम कम और मैडम के तेवर संभालने की ट्रेनिंग ज्यादा लेनी पड़ेगी।"
'छत्तीसगढ़ में प्रयोग के तौर पर भेजा'
अहलावत ने कहा कि अमेठी में हार के बाद अमेठी की जनता को छोड़कर अज्ञातवास में चली गईं स्मृति ईरानी को अब भाजपा ने छत्तीसगढ़ में प्रयोग के तौर पर भेज दिया है। उन्होंने कहा कि "एक दौर था जब विपक्ष में रहते हुए स्मृति ईरानी 400 रुपये के गैस सिलेंडर पर सिर पर सिलेंडर उठाकर सड़कों पर उग्र प्रदर्शन करती थीं और महंगाई के नाम पर छाती पीटती थीं, लेकिन आज जब देश और प्रदेश में सिलेंडर के दाम आसमान छू रहे हैं और आम जनता महंगाई की मार से त्रस्त है, तब मैडम की आवाज़ पूरी तरह गुम हो चुकी है।
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'ड्रामा' कितनी टीआरपी बटोरता है'
उन्होंने तंज कसते हुए कहा "छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और यहाँ के लोग सीधे, सरल और मेहनतकश हैं। उम्मीद है कि यहां जमीनी मुद्दों और जनसमस्याओं पर बात होगी, न कि सिर्फ कैमरे के सामने स्क्रिप्टेड डायलॉगबाज़ी। बाकी देखना यह दिलचस्प होगा कि बस्तर के जंगलों से लेकर सरगुजा की वादियों तक भाजपा का यह नया 'ड्रामा' कितनी टीआरपी बटोर पाता है।" अहलावत ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ की जनता अब जुमलों और दिखावे की राजनीति से ऊब चुकी है। प्रदेश को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और किसानों के हक में ठोस नीतियों की जरूरत है, न कि राजनीतिक पर्यटन और चुनावी ड्रामे की।