बलरामपुर रामानुजगंज के ग्राम राधानगर (तहसील रामानुजगंज) की शासकीय भूमि को फर्जी पट्टे के आधार पर अवैध रूप से विक्रय किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम निवासी नीलेश दुबे ने जिला कलेक्टर बलरामपुर को आवेदन प्रस्तुत कर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।विवादित पट्टे का नायब तहसीलदार के न्यायालय में पेशी चल ही रहा था इस बीच रजिस्ट्री हो गई। आवेदक के अनुसार, ग्राम राधानगर की भूमि पुराना खसरा नंबर 214 एवं 229 (वर्तमान खसरा नंबर 49, रकबा 2.25 हेक्टेयर) मूलतः झाड़ी-जंगल मद की शासकीय भूमि थी।
आरोप है कि अनावेदकगण —अनिल, उपेन्द्र, प्रशांत, वीरेन्द्र और सुशील तिवारी ने अपने पिता स्वर्गीय सूर्यदेव तिवारी, जो कि शासकीय शिक्षक थे, के नाम पर वर्ष 1954-55 में कूटरचना कर अवैध रूप से पट्टा दर्ज कराया। बताया गया कि अनावेदक क्रमांक 3 प्रशांत तिवारी उस समय राधानगर में पटवारी के पद पर पदस्थ थे और अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी की गई।
आवेदक ने कहा कि उक्त भूमि पर उसके पिता स्व. गुप्तेश्वर दुबे का वर्षों से भौतिक कब्जा रहा है और वे निरंतर कृषि कार्य करते रहे हैं। उनके निधन के बाद भी आवेदक खेती करता आ रहा है। भूमि विवाद का पुनरीक्षण प्रकरण वर्तमान में अपर कलेक्टर बलरामपुर के समक्ष जांचाधीन है। इसके बावजूद, अनावेदकगण ने 28 अक्टूबर 2025 को संबंधित भूमि का विक्रय-पत्र पंजीकृत करा लिया, जिसका क्रमांक CG-2025-26-187-1-910 बताया गया है। यह कार्यवाही छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 165(7-ख) का खुला उल्लंघन बताई जा रही है।
आवेदक ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में तहसीलदार और पदेन उप पंजीयक रामानुजगंज ने अनावेदकगण के प्रभाव में आकर संहिता के विपरीत कार्य किया। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा अवैध विक्रय-पत्र को निरस्त किया जाए। तहसीलदार एवं प्रभारी उप पंजीयक मनोज पैकरा ने कहा कि नियमानुसार रजिस्ट्री हुई है।