बलरामपुर मुख्यालय स्थित संयुक्त जिला कार्यालय भवन की निर्माण गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। 30 करोड़ रुपये से अधिक लागत से निर्मित इस बहुमंजिला सरकारी भवन में मूसलाधार बारिश ने बड़े पैमाने पर सीलन और रिसाव की पोल खोल दी है। हालत यह है कि करीब 20 से अधिक विभागों के कार्यालयों की छतों से लगातार पानी टपक रहा है जिससे अधिकारी कर्मचारी ही नहीं, आम जनता भी परेशान है।
संयुक्त जिला कार्यालय भवन में कलेक्टर कार्यालय समेत राजस्व, पंचायत, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, श्रम, खाद्य, योजना, कृषि, स्वास्थ्य, खनिज सहित 20 से अधिक विभाग संचालित होते हैं। लगातार बारिश के चलते इन सभी कार्यालयों में पानी टपक रहा है। कई स्थानों पर दीवारों से बहता पानी फाइलों और उपकरणों तक पहुंच रहा है। इससे जरूरी दस्तावेजों के खराब होने और कम्प्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
कच्चे ईट की दीवारें हुई जर्जर, शुरू से उठते रहे हैं सवाल
संयुक्त कार्यालय भवन के निर्माण में शुरू से ही निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। जानकारी के अनुसार, तत्कालीन कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन के कार्यकाल में भवन निर्माण में कच्चे ईटों का प्रयोग किया गया था, जिसे लेकर उस समय विवाद भी हुआ था। अब वही कच्चे ईंटे धीरे-धीरे जर्जर हो रही हैं। भवन की दीवारें जगह-जगह से टूटने लगी है, जिससे आने वाले समय में इसकी संरचनात्मक मजबूती पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला मुख्यालय का दर्जा मिला, तब प्रशासनिक भवनों की कमी के चलते कलेक्टर कार्यालय पुराने जनपद कार्यालय भवन में संचालित होता था। विभिन्न विभाग इधर-उधर के निजीया किराए के भवनों में काम कर रहे थे। इसके बाद बड़ी उम्मीदों के साथ संयुक्त जिला कार्यालय भवन तैयार किया गया, लेकिन कुछ ही वर्षों में इसकी हालत खराब हो गई
दस्तावेज और कंप्यूटरों को बचाना बड़ी चुनौती
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, लगातार हो रही बारिश से कार्यालयों में रखे कीमती दस्तावेजों और कंप्यूटर सिस्टम को सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है। थोड़ी सी भी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकता है। कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने कहा कि लोक निर्माण विभाग मरम्मत किए जाने के निर्देश दिए गए हैं