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राखी बांधने घर लौटने वाली थीं दोनों बेटियां: नेपाल की तबाही में छत्तीसगढ़ की दो बेटियां लापता, परिजन बोले...

सार

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ के बाद छत्तीसगढ़ के दो परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बिलासपुर की मूल निवासी और फिनलैंड में रह रहीं डॉक्टर प्रियंका चौधरी और सरगुजा की ब्रिटिश नागरिक डॉक्टर मीना गुप्ता अब तक लापता हैं।
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नेपाल बाढ़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ के बाद छत्तीसगढ़ के दो परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बिलासपुर की मूल निवासी और फिनलैंड में रह रहीं डॉक्टर प्रियंका चौधरी और सरगुजा की ब्रिटिश नागरिक डॉक्टर मीना गुप्ता अब तक लापता हैं। दोनों कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों के दल में शामिल थीं।
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जानकारी के मुताबिक, दोनों डॉक्टर करीब 77 यात्रियों के समूह के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। यात्रा पूरी करने के बाद 25 अगस्त को यह दल नेपाल-तिब्बत सीमा पर रसुवागढ़ी स्थित इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा था। इसी दौरान अचानक आई बाढ़ ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद से दोनों समेत कुछ यात्रियों से संपर्क टूट गया।

डॉ. प्रियंका के पिता रमेश चौधरी ने बताया कि 25 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनकी पत्नी की बेटी से फोन पर बात हुई थी। प्रियंका ने बताया था कि वह इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद है और बाद में दोबारा बात करेगी। करीब 9:14 बजे आपदा की खबर सामने आई। इसके बाद परिवार ने लगातार फोन लगाने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
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रमेश चौधरी के मुताबिक, इससे एक रात पहले परिवार ने प्रियंका से करीब एक घंटे तक बात की थी। उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा के अनुभव भी साझा किए थे। परिवार को उम्मीद थी कि 26 अगस्त को दिल्ली पहुंचने के बाद वह रक्षाबंधन पर बिलासपुर लौटकर अपने छोटे भाई को राखी बांधेंगी। प्रियंका ने छत्तीसगढ़ से अपनी स्कूली शिक्षा और बीडीएस की पढ़ाई पूरी की थी। बाद में वह उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन गईं और फिर फिनलैंड में पीएचडी करने के बाद वहीं बस गईं। वर्तमान में वह एक विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य से जुड़ी हैं।

अंबिकापुर निवासी डॉ. मीना गुप्ता भी इसी दल में शामिल थीं। उनके पिता करता राम गुप्ता ने बताया कि मीना ने उन्हें भी काठमांडू आने और साथ लौटने के लिए कहा था, लेकिन बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए उन्होंने यात्रा से इनकार कर दिया था। परिवार ने रक्षाबंधन पर दिल्ली में एक साथ मिलने की योजना बनाई थी। मीना 14 अगस्त को दिल्ली पहुंची थीं और इसके बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दल के साथ रवाना हुईं। उन्होंने 23 अगस्त को यात्रा पूरी की थी। मीना की शुरुआती शिक्षा अंबिकापुर के होली क्रॉस स्कूल में हुई थी। डॉक्टर बनने के बाद वह इंग्लैंड चली गईं और करीब 15 वर्षों से वहीं रह रही थीं। वह त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं।

सरकार ने शुरू की तलाश, नौ लोगों की जानकारी मिली
राज्य सरकार के अनुसार छत्तीसगढ़ से जुड़े कई यात्रियों के संबंध में जानकारी सामने आई है। दो लोगों ने अपने परिवार से संपर्क कर सुरक्षित होने की जानकारी दी है, जबकि रायपुर के पांच लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है और वे वापस लौटने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि, बिलासपुर की डॉ. प्रियंका चौधरी और सरगुजा की डॉ. मीना गुप्ता का अब तक पता नहीं चल पाया है। राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों और उनके परिजनों से किसी भी जानकारी के लिए राज्य कंट्रोल रूम से संपर्क करने की अपील की है।

उधर, नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। भीषण बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोगों की मौत और हजारों लोगों के लापता होने की खबर है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के दोनों परिवार अब प्रशासन और राहत दलों से किसी सकारात्मक खबर का इंतजार कर रहे हैं।
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टोल फ्री हेल्पलाइन: 1070
कंट्रोल रूम: 0771-2223471
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