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छत्तीसगढ़: 90 सदस्यीय विधानसभा में 14 मंत्री!, संवैधानिक सीमा पर हाईकोर्ट में फिर शुरू हुई सुनवाई

Sat, 05 Sep 2026 08:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर

सार

90 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर मंत्रिपरिषद की संख्या 15 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से अधिक होने का दावा करते हुए कांग्रेस और सामाजिक कार्यकर्ता बसदेव चक्रवर्ती ने 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती दी है।
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14वें मंत्री की नियुक्ति का मामला, सरकार को नोटिस
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ सरकार में 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अब सुनवाई आगे जारी रहेगी। 90 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर मंत्रिपरिषद की संख्या 15 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से अधिक होने का दावा करते हुए कांग्रेस और सामाजिक कार्यकर्ता बसदेव चक्रवर्ती ने 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में समान मुद्दे से जुड़ा मामला समाप्त होने के बाद हाईकोर्ट ने अब राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है।
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याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 164(1क) के तहत किसी राज्य में मंत्रिपरिषद की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। इसी आधार पर याचिका में साय सरकार में 14वें मंत्री की नियुक्ति को संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत बताते हुए चुनौती दी गई है।

साय सरकार में तीन नए मंत्रियों को शामिल किए जाने के बाद मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 14 हो गई है। याचिकाकर्ताओं ने इसी 14वें मंत्री की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिका में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, सामान्य प्रशासन विभाग और मंत्रिपरिषद के सभी 14 सदस्यों को पक्षकार बनाया गया है।
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इस मामले की सुनवाई पहले सुप्रीम कोर्ट में समान संवैधानिक मुद्दे से जुड़ी कार्यवाही लंबित होने के कारण आगे नहीं बढ़ रही थी। हाईकोर्ट में 2 सितंबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि याचिका में उठाया गया मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले से जुड़ा है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की स्थिति स्पष्ट होने तक सुनवाई रोक दी थी।

जिस मामले के कारण हाईकोर्ट की कार्यवाही रुकी थी, वह एनपी प्रजापति बनाम मध्यप्रदेश के राज्यपाल एवं अन्य से संबंधित था। 18 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि संबंधित राज्य विधानसभा के चुनाव संपन्न हो चुके हैं, इसलिए मामला निरर्थक हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए याचिका को निरर्थक होने के आधार पर समाप्त कर दिया। इसके साथ ही लंबित अंतरिम और हस्तक्षेप आवेदनों का भी निपटारा कर दिया गया।

1 सितंबर को हाईकोर्ट में फिर हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही समाप्त होने के बाद 1 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इस मामले की फिर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट में मामला समाप्त होने की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। इसके साथ ही अब इस जनहित याचिका पर सुनवाई आगे जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर भादुड़ी के साथ अधिवक्ता अब्युदय सिंह ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और शशांक ठाकुर अदालत में उपस्थित रहे।

याचिकाकर्ता की पात्रता पर भी मांगी गई थी जानकारी
इससे पहले 29 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट ने जनहित याचिकाकर्ता बसदेव चक्रवर्ती की पात्रता और सामाजिक गतिविधियों को लेकर भी जानकारी मांगी थी। कोर्ट ने उन्हें अपने सामाजिक कार्यों और गतिविधियों का विवरण शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में याचिकाकर्ता की ओर से संबंधित दस्तावेज और तस्वीरें भी अदालत में प्रस्तुत की गई थीं। अब मामले में राज्य सरकार के जवाब के बाद हाईकोर्ट में आगे की सुनवाई होगी। 14वें मंत्री की नियुक्ति को लेकर उठाए गए संवैधानिक सवालों पर अदालत का अगला रुख क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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