बिलासपुर में आरटीई के तहत बच्चों के प्रवेश और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने पूछा है कि RTE अधिनियम की धारा 12(1)(c) को लागू करने के लिए वर्तमान में कौन-सी SOP प्रभावी है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बच्चों के शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत प्रवेश और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।
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मामले में सीवी भगवंत राव ने आरटीई के तहत प्रवेश को लेकर जनहित याचिका दायर की है। इसके साथ ही 13 अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(c) को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए वर्तमान में कौन-सी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू है। कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में विस्तृत जानकारी हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत करने को कहा है।
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक स्कूल से संबंधित विस्तृत डेटा भी मांगा है। सरकार को चार्ट के माध्यम से बताना होगा कि प्रत्येक स्कूल में आरटीई के तहत कितनी सीटें आरक्षित हैं, कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया है और कितनी सीटें अभी खाली हैं। कोर्ट के इस निर्देश से राज्य में आरटीई के तहत होने वाले प्रवेश की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता ने मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को रखने का अनुरोध किया। उन्होंने तब तक हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने का आश्वासन दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से सात दिन पहले हलफनामा दाखिल किया जाए और उसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाए।