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बिलासपुर : हाईकोर्ट ने वीएसके ऐप पर शिक्षकों की कार्रवाई पर लगाई रोक, कोर्ट ने राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

Wed, 18 Feb 2026 08:38 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर

सार

प्रदेश के शिक्षकों के लिए वीएसके ऐप को लेकर राहत भरी खबर आई है। हाईकोर्ट ने वीएसके ऐप को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल याचिकाकर्ता शिक्षक को ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा जा सकेगा।
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बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के शिक्षकों के लिए वीएसके ऐप को लेकर राहत भरी खबर आई है। हाईकोर्ट ने वीएसके ऐप को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल याचिकाकर्ता शिक्षक को ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा जा सकेगा। याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी रोक रहेगी। मामले की सुनवाई जस्टिस एन के चंद्रवंशी की सिंगल बेंच में हुई।

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दरअसल, शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन ने VSK ऐप की अनिवार्यता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी थर्ड पार्टी ऐप को शिक्षकों पर जबरन लागू नहीं कर सकती। इसे शिक्षकों की निजता का उल्लंघन बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षकों के व्यक्तिगत मोबाइल फोन का उपयोग शासकीय कार्यों के लिए बाध्यकारी रूप से नहीं कराया जा सकता।

कोर्ट ने राज्य सरकार को जारी किया नोटिस 
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार से दो सप्ताह में विस्तृत जवाब पेश करने को कहा गया है। हालांकि यह आदेश कोर्ट ने सिर्फ याचिकाकर्ता शिक्षक के संदर्भ में जारी किया है। इसका लाभ अन्य शिक्षकों को भी मिलेगा या नहीं, यह अभी साफ नहीं है।
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अंतरिम आदेश में स्पष्ट निर्देश 
कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक राज्य सरकार शिक्षकों को VSK ऐप लागू करने के लिए बाध्य नहीं करेगी। साथ ही, इस मुद्दे को लेकर किसी भी शिक्षक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। मामले में याचिकाकर्ता कमलेश सिंह बिसेन ने खुद अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिका में दो प्रमुख मुद्दों को उठाया गया है। पहला, शिक्षकों की निजता का प्रश्न और दूसरा, निजी संसाधनों के अनिवार्य उपयोग का विषय। उनके अनुसार, यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय है।

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