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Bilaspur: केन्द्र और राज्य सरकार समेत कलेक्टर रायगढ़, और इन लोगों को हाईकोर्ट से नोटिस जारी, जानें मामला

Wed, 05 Mar 2025 07:50 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर

सार

 चीफ जस्टिस रमेश सिंह और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ ने गारे फोर बाई सिक्स कॉल ब्लॉक भू अधिग्रहण से प्रभावित 49 किसानों की याचिका पर राज्य सरकार केंद्र सरकार कलेक्टर रायगढ़, एसडीओ घरघोड़ा और जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड को नोटिस जारी किया है।
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बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिंह और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ ने गारे फोर बाई सिक्स कॉल ब्लॉक भू अधिग्रहण से प्रभावित 49 किसानों की याचिका पर राज्य सरकार केंद्र सरकार कलेक्टर रायगढ़, एसडीओ घरघोड़ा और जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में किसानों ने नया भूमि अधिग्रहण कानून बनाए जाने के बावजूद छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता की धारा 247 के तहत किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को चुनौती दी है। याचिका में इस बात को भी चुनौती दी गई है, कि जो मुआवजे का निर्धारण किया जा रहा है वह 2010 के अधिसूचना की दरों के आधार पर किया जा रहा है जबकि 15 साल में जमीनों के भाव बहुत बढ़ गए हैं। 

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आज छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चंदन सिंह सिदार समेत 49 किसानों जिसमें अधिकतर आदिवासी समुदाय के हैं, उनके द्वारा लगाई गई याचिका पर प्राथमिक सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि गारे फोर बाई सिक्स कॉल ब्लॉक का भूमि अधिग्रहण 2024 सितंबर में शुरू किया गया है, परंतु इसका खनन पट्टा 2023 में ही जारी कर दिया गया है यह संविधान की धारा 300 A का खुला उल्लंघन है क्योंकि किसी भी निजी भूमि को बिना विधिवत कानून के अधिग्रहण कर मुआवजा दिए बगैर उसे जमीन का अधिकार किसी और को नहीं सौंपा जा सकता। याचिका कर्ताओं की तरफ से यह भी बताया गया कि नया भूमि अधिग्रहण कानून पुनर्वास और पुनर्स्थापना पर प्रभावित व्यक्तियों को कानूनी अधिकार देता है। इस नए भू अधिग्रहण कानून के आने के पश्चात भू राजस्व संहिता की धारा 247 में राज्य की विधानसभा ने केवल मुआवजे के संबंध में नए कानून लागू होने का संशोधन किया परंतु पुनर्वास और पुनर्स्थापना के आदि पर कोई भी संशोधन नहीं है। संविधान की धारा 254 के अनुसार यदि संसद के द्वारा किसी क्षेत्र में कानून बना दिया गया है तो उसे क्षेत्र पर राज्य विधानसभा की ओर से बनाए गए कोई कानून लागू नहीं होते अतः यह पूरी भू अधिग्रहण की कार्यवाही असंवैधानिक है। 

याचिका कर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि कि राज्य सरकार या कलेक्टर किस आधार पर अवार्ड पास कर रहे हैं वह भी नहीं बता रहे हैं और ना ही भूमि अधिग्रहण अवार्ड की प्रति दी गई है। इसके विपरीत कई किसानों की जमीनों पर अवैध कब्जा जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के द्वारा माह सितंबर अक्टूबर 2024 से कर दिया गया है। याचिका में 2010 की राज्य सरकार की उस अधिसूचना को भी चुनौती दी गई है जिसके द्वारा किसानों को प्रति एकड़ भूमि मुआवजे का निर्धारण आज 15 साल बाद भी किया जा रहा है। 
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राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत में आज इस मसले पर सरकार का पक्ष रखा और कहा कि पूर्व में एक याचिका लगाई जा चुकी है। जिसमें कलेक्टर को सभी समस्याओं को सुनकर निराकरण करने का आदेश हुआ था और कलेक्टर ने उन सभी समस्याओं का निराकरण कर दिया है। अतः यह नई याचिका चलने योग्य नहीं है। इस तथ्य के जवाब में याचिकाकर्ताओ की ओर से बताया गया कि पहले की याचिका केवल 8 प्रभावितों के द्वारा लगाई गई थी और यह याचिका 49 व्यक्तियों के द्वारा लगाई गई है इसके अलावा कलेक्टर के आदेश में मिली जानकारी के आधार पर ही यह नई याचिका तैयार की गई है जिससे यह पहली बार पता लगा के भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया प्रारंभ होने के पहले ही माइनिंग लीज दी जा चुकी है। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट  ने राज्य सरकार, भारत सरकार, कोयला मंत्रालय, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, कलेक्टर रायगढ़, घरघोड़ा एसडीओ सभी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब देने के लिए निर्देश दिए हैं।

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