फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिलासपुर: पूर्व मंत्री कवासी लखमा को हाईकोर्ट से झटका, चर्चित शराब घोटाले में जमानत याचिका खारिज

Fri, 18 Jul 2025 07:03 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर

सार

हाईकोर्ट ने प्रदेश के चर्चित शराब घोटाले के केस में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कवासी लखमा शराब घोटाला केस में जेल में बंद हैं। कोर्ट ने कहा- मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
छत्तीसगढ़ पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाईकोर्ट ने प्रदेश के चर्चित शराब घोटाले के केस में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कवासी लखमा शराब घोटाला केस में जेल में बंद हैं। कोर्ट ने कहा- मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती। मामले की की सुनवाई जस्टिस अरविंद वर्मा की बेंच में हुई। 

विज्ञापन


दरअसल, शराब घोटाला मामले में ईडी ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को इसी साल 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था। इस मामले में EOW ने भी केस दर्ज किया है, और गिरफ्तारी की। जिसकी जांच के बाद चार्ज शीट पेश की गई। कवासी लखमा ने अपने वकील हर्षवर्धन के माध्यम से अलग-अलग याचिका दायर की है। शुक्रवार को EOW की गिरफ्तारी के केस में बेल पर सुनवाई हुई, जिसमें तर्क दिया गया, कि साल 2024 में केस दर्ज किया गया था, जिसमें डेढ़ साल बाद गिरफ्तारी की गई है, जो गलत है। इस दौरान कभी उनका पक्ष ही नहीं लिया गया। लेकिन, जब उन्हें गिरफ्तारी का शक हुआ और अग्रिम जमानत अर्जी लगाई, तब अरेस्ट कर लिया गया। कोर्ट को यह भी बताया गया कि केवल बयानों के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया है। जबकि, उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। पूर्व मंत्री को राजनीतिक षडयंत्र के तहत फंसाने का आरोप लगाया गया है।

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान EOW की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने बताया कि चार्जशीट के मुताबिक कवासी लखमा के बंगले में हर महीने 2 करोड़ रुपए कमीशन पहुंचता था। शराब घोटाला सिंडीकेट की तरह चलता था, जिसमें अधिकारी से लेकर मंत्री तक कमीशन लेते थे।  EOW के अधिकारियों ने लखमा के 27 करीबियों से बयान लेकर इस बात का साक्ष्य इकट्ठा किया है। जिसमें उनकी भूमिका और मिलीभगत के सारे साक्ष्य मौजूद हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें