धमतरी निवासी महिला का 28 अप्रैल 2009 को हिन्दू रीति से विवाह हुआ। शादी के बाद दिसंबर 2010 में पहली संतान और अप्रैल 2014 में दूसरी संतान का जन्म हुआ। अप्रैल 2017 में पत्नी ने पति उसके भाई एवं मां के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आईपीसी की धारा 498 ए के तहत सभी के खिलाफ जुर्म दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। न्यायालय ने सुनवाई उपरांत पति व उसके परिवार के सदस्यों को आईपीसी की धारा 498 ए से बरी किया। इसके खिलाफ पत्नी ने पति व उसके भाई व मां के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। अपील खारिज होने पर उसने सुप्रीम कोर्ट में भी एसएलपी प्रस्तुत की थी।
पति ने क्रूरता के आधार पर धमतरी परिवार न्यायालय में आवेदन किया । परिवार न्यायालय ने आवेदन खारिज कर दिया। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील की। जस्टिस संजय के.अग्रवाल एवं जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डीबी में अपील पर सुनवाई हुई। डीबी ने पति की अपील को स्वीकार कर क्रूरता के आधार पर उसे तलाक का हकदार माना।
कोर्ट ने आदेश में कहा पत्नी का अपनी सास के खिलाफ निराधार,अशोभनीय और मानहानिकारक आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करना, पति और उसके माता-पिता के बरी होने पर सवाल उठाते हुए अपील दायर करना, यह सब दिखाता है कि उसने यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया कि पति और उसके माता-पिता को जेल हो जाए और उसे उसकी नौकरी से निकाल दिया जाए।