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दुष्कर्म के आरोपी की सात साल की सजा रद्द: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने किशोर न्याय बोर्ड को सौंपा केस, 24 साल पुराना

Fri, 19 Sep 2025 08:36 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर

सार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2001 के बलात्कार मामले में 7 साल की सजा को रद्द कर दिया, क्योंकि आरोपी घटना के समय 16 साल 8 महीने का नाबालिग था, और केस को किशोर न्याय बोर्ड को भेजते हुए 6 महीने में फैसला देने का आदेश दिया। आरोपी, जो अब 40 साल से अधिक का है। 
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 24 साल पुराने बलात्कार के आरोपी की सात साल की सजा निरस्त की है। जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच ने कहा कि घटना के समय आरोपी 16 साल 8 माह का नाबालिग था, इसलिए केस किशोर न्याय बोर्ड को भेजा जाए। बोर्ड को छह माह में निर्णय देने के निर्देश दिए गए हैं। आरोपी अब 40 साल से ज्यादा उम्र का हो चुका है।

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उल्लेखनीय है कि निचले कोर्ट द्वारा दी गई सजा के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत की थी। सुनवाई के दौरान उसकी ओर से दस्तावेजों के साथ तर्क दिए गए कि घटना के समय वह नाबालिग था। बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी की जन्मतिथि 15 अक्टूबर 1984 है। इस हिसाब से घटना के समय उसकी उम्र 16 साल 8 महीने 19 दिन थी।

घटना 3 जुलाई 2001 की रात रतनपुर क्षेत्र के एक गांव में हुई। पीड़िता 15 वर्ष की किशोरी का आरोपी रिश्ते में मौसेरा भाई है। घटना की रात वह पीड़िता के घर रुका था। देर रात उसने जबरन उसके साथ दुष्कर्म किया। अगले दिन पीड़िता ने परिजन को पूरी बात बताई। दर्ज कराई गई रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने उसको गिरफ्तार किया। सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने 29 अप्रैल 2002 को आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) के तहत 7 साल सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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आरोपी की अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी अभियुक्त की उम्र अपराध की तारीख पर देखी जाती है, सजा सुनाए जाने की तारीख पर नहीं। कोर्ट ने माना कि आरोपी घटना के समय नाबालिग था और उसे किशोर न्याय अधिनियम, 2000 का लाभ मिलना चाहिए। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए प्रकरण किशोर न्याय बोर्ड बिलासपुर को भेजने का निर्देश दिया।

किशोर न्याय बोर्ड को सिंगल बेंच ने आदेश दिया कि वह आरोपी की उम्र, अब तक बिताई गई जेल अवधि (करीब डेढ़ साल) और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए छह महीने में अंतिम निर्णय दे। जिनमें यह तथ्य भी शामिल है कि आरोपी और पीड़िता अब अलग-अलग परिवारों में शादीशुदा हैं और उनके बच्चे भी हैं।हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत बरकरार रखी है। उसे 8 अक्टूबर 2025 को किशोर न्याय बोर्ड के सामने उपस्थित होना होगा।

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