यह आदेश दिए गए थे जनहित याचिका में--
वर्ष 2016 में इसी मुद्दे पर नितिन सिंघवी की जनहित याचिका में निम्न विस्तृत निर्देश दिए गए थे।
-कलेक्टर और एसपी सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी वाहन पर साउंड बॉक्स नहीं बजने दिया जाए। ऐसा होता मिलने पर साउंड बॉक्स को जब्त किया जाए और बिना मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) के आदेश के साउंड बॉक्स वापस न किया जाए।
-दोबारा पकड़े जाने पर वाहन का परमिट निरस्त किया जाना है तथा उच्च न्यायालय के आदेश बिना उस वाहन को कोई भी नया परमिट नहीं जारी किया जाएगा।
-रात 10 बजे के बाद डीजे बजने पर म्यूजिक सिस्टम जब्त किए जाएं। शादियों, जन्मदिन और धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रमों में निर्धारित मापदंड से अधिक ध्वनि विस्तार होने पर, पुलिस के मना करने के बावजूद आयोजकों द्वारा ध्वनि प्रदूषण करने पर आयोजक के विरुद्ध हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का अवमानना का प्रकरण दायर किया जाए।
-वाहनों में प्रेशर हॉर्न और मल्टीटोन हॉर्न पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी तत्काल ही उसे वाहन से निकलवा कर नष्ट करेंगे और मामला रजिस्टर में दर्ज करेंगे। अधिकारीगण इस संबंध में वाहन नंबर के साथ मालिक तथा चालक का डेटाबेस इस रूप में रखें कि दोबारा अपराध करने पर वाहन जब्त किया जाए और हाईकोर्ट के आदेश के बिना जब्त वाहनों को नहीं छोड़ा जाए।
-स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, कोर्ट, ऑफिस से 100 मीटर एरियल डिस्टेंस पर लाउडस्पीकर बजने पर कलेक्टर, एसपी को ध्वनि विस्तार यंत्रों को जब्त करना होगा। इनको बिना मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) की अनुमति के वापस नहीं किया जाए। दूसरी बार गलती पर जब्त किए गए यंत्रों को हाईकोर्ट के आदेश बिना वापस नहीं किया जाएगा।