मंगलवार सुबह से शुरू हुए फलिस्तीनी झंडे के विवाद ने बिलासपुर में स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। तारबाहर थाना क्षेत्र में कुछ युवकों द्वारा फलिस्तीन का झंडा लहराने के बाद हिंदू संगठनों ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। इसके परिणामस्वरूप पुलिस ने पांच आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद, आरोपियों के परिजन जमानत के लिए सड़क पर उतर आए। हालांकि, जमानत की प्रक्रिया सिटी मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर के बिना पूरी नहीं हो पाई, जिसके कारण पांचों आरोपियों को जेल में रखा गया। इस परिजनों ने जमानत की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने की मांग की और कलेक्ट्रेट के सामने चक्का जाम कर दिया, जिससे लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बन गई।
सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और नारेबाजी कर रहे लोगों को सड़क से हटाने में सफल रहे। बावजूद इसके, देर रात तक परिजन अपनी मांग को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में डटे रहे। इस आंदोलन में कुछ राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हो गए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया। प्रदर्शनकारी जमानत की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग कर रहे हैं और मामले को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
प्रियंका शुक्ला, वकील जो आरोपी पक्ष की हैं उनका कहना हैं 'हमारी मांग है कि जमानत की प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए। हमारे परिजन गलत तरीके से जेल में हैं। पीयूष तिवारी, एसडीएम, बिलासपुर उनका कहना हैं 'हम स्थिति को नियंत्रित कर रहे हैं और सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।' यह विवाद बिलासपुर में तनाव और राजनीतिक हलचल का कारण बन गया है, और आगे की स्थिति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।