बिलासा देवी केवट हवाई अड्डे के रनवे विस्तार और हवाई सुविधाओं के विकास को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार को हवाई अड्डे को 4सी श्रेणी में उन्नत करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों का ब्योरा तीन सप्ताह में हलफनामे के जरिये देने का निर्देश दिया। राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष दावा किया कि वर्तमान में यह हवाई अड्डा 3सी श्रेणी में एटीआर विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है और सरकार इसे 4सी श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उच्च न्यायालय ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को भी हवाई अड्डे के प्रबंधन, संचालन और विकास की जिम्मेदारी लेने के लिए अब तक उठाए गए कदमों का विवरण देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
केवल कागजी पत्राचार में समय न गंवाने की हिदायत
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि बिलासपुर हवाई अड्डे और हवाई सेवाओं के विस्तार के लिए केंद्र और राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। अदालत ने कहा कि दोनों सरकारें केवल आपस में पत्राचार करके समय व्यतीत न करें। उल्लेख योग्य है कि 29 सितंबर की पिछली सुनवाई में उच्च न्यायालय ने एएआई के वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी को शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई हुई है। मंगलवार की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि एएआई की तरफ से दाखिल शपथ पत्र किसी वरिष्ठ सक्षम अधिकारी का नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने दस्तावेज के हवाले से कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार बिलासपुर के साथ-साथ अंबिकापुर और जगदलपुर हवाई अड्डों को भी एएआई को सौंपने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
एएआई के पत्राचार और रनवे की लंबाई पर आपत्ति
याचिकाकर्ताओं के अनुसार एएआई ने राज्य सरकार के प्रस्ताव पर स्पष्ट सहमति या असहमति व्यक्त करने के बजाय हवाई अड्डे की उपलब्ध भूमि, कुल क्षेत्रफल, खसरा वार ब्योरा, मालिकाना हक और सुविधाओं की जानकारी मांगी है। उनका तर्क है कि इस प्रकार के पत्राचार से समय सीमा के भीतर प्रबंधन एएआई को सौंपना कठिन हो जाएगा। अदालत में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और एएआई की तरफ से अधिवक्ता अनुमेह श्रीवास्तव उपस्थित हुए। याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के दावों का विरोध करते हुए कहा कि बिलासपुर हवाई अड्डे का रनवे महज 1,495 मीटर का है। यह अंबिकापुर के 1,900 मीटर और जगदलपुर के 1,707 मीटर लंबे रनवे से काफी छोटा है। गर्मी के दिनों में तापमान बढ़ने पर विमान की क्षमता के अनुसार सभी यात्रियों को ले जाना संभव नहीं होता। ऐसे में 72 यात्रियों के स्थान पर संख्या घटाकर लगभग 52 करनी पड़ती है। इसी कारण कोई निजी विमानन कंपनी बिलासपुर से परिचालन आरंभ नहीं कर पा रही है।
अटकी विकास योजनाएं और उच्च न्यायालय का नया आदेश
याचिकाकर्ताओं ने पीठ को सूचित किया कि रनवे विस्तार के लिए 63 करोड़ रुपये तथा नए एटीसी टावर के निर्माण हेतु 41 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बिलासपुर हवाई अड्डा प्रबंधन की ओर से मंत्रालय को भेजा जा चुका है। परंतु यह कार्य एएआई करेगी या राज्य सरकार, इस पर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है। उच्च न्यायालय ने सुनवाई समाप्त करते हुए विमानन विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि वे बिलासपुर हवाई अड्डे को 4सी श्रेणी में उन्नत करने हेतु किए गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी तीन सप्ताह में शपथ पत्र के जरिये पेश करें। एएआई को भी अद्यतन स्थिति बताते हुए अपना हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।