इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न्यायालय के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ नोटिस चस्पा किए गए थे। निर्धारित समय में अनुपस्थित रहने पर संपत्ति कुर्की की चेतावनी भी दी गई थी। फिर भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई। इससे अपराधियों को छूट मिलने जैसी धारणा समाज में फैल रही है। यह शासन-प्रशासन पर लोगों के विश्वास को झकझोर रहा है।
विभागीय कार्रवाई पर सवाल
ज्ञापन में बताया गया कि दोनों आरोपी लंबे समय से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित हैं। विभागीय स्तर पर सेवा समाप्ति या अन्य कार्रवाई नहीं की गई। समिति ने छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र का हवाला दिया। इसमें अनधिकृत अनुपस्थिति की स्थिति में विभागीय जांच और सेवा समाप्ति का प्रावधान है। इसके बावजूद कार्रवाई न होने पर समिति ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।