इंद्रावती नदी में अवैध सड़क बनाकर रेत तस्करी के खेल का खुलासा होते ही आखिरकार प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए माफियाओं की तैयारियों पर पानी फेर दिया। खबरों में लगातार उठाए गए मुद्दे के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और नदी के भीतर बनाए गए करीब 200 मीटर लंबे अवैध रास्ते को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
कलेक्टर समित मिश्रा के निर्देश पर एसडीएम यशवंत नाग, तहसीलदार लक्ष्मण कुमार राठिया, जनपद पंचायत सीईओ, राजस्व अमला और पुलिस की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए उस रास्ते को हटाया, जिसे रेत के अवैध परिवहन के लिए तैयार किया गया था। यह वही रास्ता था, जिसके जरिए भारी वाहन सीधे नदी में उतरकर रेत निकालने की तैयारी में थे। माफियाओं ने इंद्रावती नदी के प्राकृतिक प्रवाह से छेड़छाड़ करते हुए पानी को दूसरी दिशा में मोड़ दिया था।
इसके लिए नदी में चार बड़े पाइल लगाए गए थे जिससे पानी एक ओर बह सके और दूसरी ओर से भारी वाहनों की आवाजाही आसान हो जाए। इतना ही नहीं नदी के टेक को करीब 30 फीट तक काटकर लगभग 50 मीटर लंबा ढलानदार रास्ता तैयार किया गया था ताकि बड़ी गाड़ियां आसानी से नीचे उतर सकें। इस पूरे निर्माण में मुरुम और रेत का उपयोग कर एक मजबूत मार्ग तैयार किया गया था जो सीधे रेत खनन और परिवहन के लिए इस्तेमाल होना था। लेकिन प्रशासन की समय रहते हुई कार्रवाई ने इस रेत कॉरिडोर को पूरी तरह खत्म कर दिया।
तेलंगाना कनेक्शन और स्थानीय संरक्षण की चर्चा
इस पूरे मामले में तेलंगाना के कामलापुर निवासी सहित बाहरी माफियाओं की भूमिका सामने आई है। बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर पंचायत सचिव रवि दुर्गम और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर रेत को तेलंगाना भेजने की तैयारी की जा चुकी थी। सीमा से सटे होने के कारण यह इलाका लंबे समय से माफियाओं की नजर में था और जैसे ही मौका मिला अवैध नेटवर्क खड़ा कर दिया गया। हालांकि समय रहते मामला उजागर होने से इस नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
मैदान में उतरा प्रशासन, दिखी सख्ती
कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक टीम सुबह से शाम तक मौके पर डटी रही, मौजूद अवैध संरचनाओं को तोड़ा और रास्ते को पूरी तरह से समाप्त कर दिया। अब कार्यवाई के लिए प्रशासन के रडार में माफिया व गांव का पंचायत सचिव आ गए है। जल्द ही कार्यवाई होने की संभावना है।
बीजापुर न्यूज