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CG News: गृह मंत्री के बस्तर दौरे के बीच सर्व आदिवासी समाज ने उठाए सवाल, कहा- जल जंगल जमीन पर कोई समझौता नहीं

Mon, 18 May 2026 01:00 PM IST
बीजापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर

सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे के बीच सर्व आदिवासी समाज ने बस्तर विकास प्रारूप पर चिंता व्यक्त करते हुए अपनी मांगें सार्वजनिक की हैं। समाज ने गृह मंत्री से मुलाकात न हो पाने के कारण प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ये भावनाएं और सुझाव सामने रखे।
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शाह के दौरे के बीच सर्व आदिवासी समाज ने उठाए सवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे के दौरान सर्व आदिवासी समाज, बस्तर संभाग ने प्रेस नोट जारी किया। समाज ने बस्तर विकास मॉडल को लेकर अपनी चिंताएं और मांगें सार्वजनिक कीं। गृह मंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात न हो पाने के कारण यह कदम उठाया गया।

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समाज ने स्पष्ट किया कि बस्तर में विकास स्थानीय आदिवासी संस्कृति, परंपरा, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप होना चाहिए। ग्रामसभा की सहमति भी अनिवार्य है। ऐसा कोई भी विकास अस्वीकार्य होगा जिससे स्थानीय लोगों का विस्थापन हो। प्राकृतिक संसाधनों पर उनका नियंत्रण समाप्त हो या सामाजिक-सांस्कृतिक असंतुलन पैदा हो। 

प्रकाश ठाकुर ने कहा कि बस्तर लंबे समय से संघर्ष और हिंसा का दंश झेलता आया है। ऐसे में शांति और विकास आवश्यक है, पर विकास के नाम पर स्थानीय समाज के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। समाज ने कई प्रमुख परियोजनाओं का विरोध किया। साथ ही, संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
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समाज ने लौह अयस्क उत्खनन परियोजनाओं में निजी कंपनियों की भागीदारी समाप्त करने की मांग की। बोधघाट एवं नदी जोड़ो परियोजनाओं को निरस्त करने पर जोर दिया। आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों को पट्टे पर देने संबंधी प्रावधान समाप्त करने को कहा। अबूझमाड़ क्षेत्र में नए सैन्य एवं अर्धसैनिक शिविर स्थापित नहीं करने की भी मांग उठाई। स्थानीय युवाओं को शासकीय सेवाओं में प्राथमिकता देने तथा स्कूलों व महाविद्यालयों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

सर्व आदिवासी समाज ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की। सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों को प्राथमिकता देने की बात कही गई। जिला खनिज न्यास की राशि का हिस्सा सीधे ग्रामसभाओं एवं पंचायतों को देने की मांग भी रखी गई। जगदलपुर विधानसभा सीट को पुनः अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित करने तथा स्थानीय भाषा-संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया गया। वन विभाग द्वारा व्यावसायिक पेड़ कटाई पर रोक लगाने की मांग भी की गई।

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