जिले के वनमंडल में ग्रामीणों को स्वरोजगार के लिए ऋण दिया जा रहा है। यह पहल चक्रीय निधि राशि के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से की गई है। परिक्षेत्र पामेड़ और आवापल्ली से चयनित हितग्राहियों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।
इस योजना के तहत दिलीप बीराबोइन को 2 लाख रुपये, दिनेश कुमार कचलाम को 3 लाख रुपये और जोशिला भगत को 2 लाख रुपये की राशि मिली। यह राशि उन्हें किराना दुकान चलाने के लिए वन प्रबंध समिति कोत्तापल्ली, मूरदोण्डा द्वारा प्रदान की गई।
इसके अतिरिक्त, नागुल सत्यनारायण को 10 लाख रुपये की सहायता आवापल्ली समिति के माध्यम से दी गई। यह सहायता ट्रैक्टर-ट्रॉली और डोजर खरीदने के लिए थी। इन वित्तीय सहयोगों से हितग्राही अब स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं। किराना दुकान संचालन, कृषि उपकरणों के उपयोग और अन्य गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
योजना का उद्देश्य
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बीजापुर जिले को नक्सल मुक्त होने के बाद मुख्यधारा से जोड़ना है। यह ग्रामीणों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, पलायन को रोकने और स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक है। चक्रीय निधि के अंतर्गत प्रदान किए गए ऋण को सरल शर्तों के साथ वापस जमा किया जा सकता है। इससे हितग्राही पुनः लाभ ले सकते हैं, साथ ही अन्य पात्र ग्रामीण भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
हितग्राहियों का आभार
हितग्राहियों ने छत्तीसगढ़ शासन के वन, जल एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मंत्री केदार कश्यप का आभार व्यक्त किया। उन्होंने शासन और प्रशासन के प्रति भी अपनी कृतज्ञता प्रकट की। हितग्राहियों ने कहा कि इस सहायता से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। इस योजना से उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है। यह वित्तीय सहयोग उनके भविष्य के लिए एक मजबूत आधार प्रदान कर रहा है।