40 साल बाद भोपालपटनम में होगा भाजपा का कब्जा
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बीजापुर जिले के जनपद पंचायत भोपालपटनम के इतिहास में पहली बार भोपालपटनम जनपद पंचायत में भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों का कब्ज़ा होगा। चार दशकों से भोपालपटनम जनपद पंचायत पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। 2025 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को करारी शिकस्त देकर कई वर्षो से संघर्ष करने के बाद भाजपा इस बार अपना परचम लहराया है। 40 वर्षों बाद जनपद की सत्ता पर काबिज होने भाजपाइयों में ख़ुशी कि लहर हैं।
इस बार भाजपा के कार्यकर्ताओ ने कड़ी मेहनत कर संगठन को मजबूत किया हैं। गावों में हर किसी से मिलकर उन्हें भरोसे में लेकर कार्यकर्त्ता वोट बटोरने में सफल हुए और इन्हे उन्हें बहुमत मिला। दिल्ली में 25 साल बाद भाजपा सरकार में आई हैं। इसी तरह चालीस साल बाद जनपदपंचायत भोपालपटनम में भाजपा के जनप्रतिनिधि चुने गये हैं। एक तरह से यह भी देखने को मिला हैं कि नक्सल दहशत कम होने के चलते इसका खासा प्रभाव भी पड़ा हैं। सरकार ने बड़ी एनकाउंटर कर नक्सलियों की कमर तोड़ी है। यह भी वजह है कि भाजपा के कार्यकर्ता निडर होकर हर गांव में घुसकर अपनी पार्टी का प्रचार किए हैं और इन्हे इसका फायदा भी मिला हैं। भोपालपटनम ब्लॉक में 10 जनपद पंचायतो की सीट पर 7 जनपद पंचायत कि सीट पर भाजपा समर्पित प्रत्याशी जीते हैं। कड़े मुकाबले में भाजपा प्रत्यशियों ने दिग्गजों को भी हराया है।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनने लगा रहे हैं दौड़
चुनाव संपन्न होने के बाद जीते हुए जनप्रतिनिधि और उनके समर्थक उन्हें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाने की जोर लगा रहे हैं।लम्बे समय बाद जनपद में भाजपा के बहुमत के बाद पदों में बैठने राजधानी कि दौड़ लगा रहे हैं। चुनाव के वक्त चुनावी मैदान में भाजपा के उभरते चेहरे नजर आये हैं। जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया हैं।
अध्यक्ष के इन नाम पर चर्चा
गणेश पोट्टम, राहुल यालम, और सरिता कुड़ेम के नामों कि चर्चा हो रही हैं। सरिता कुड़ेम का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। क्योंकि उन्होंने वर्तमान जनपद अध्यक्ष निर्मला मरपल्ली व 20 सालों से सरपंच रही टिंगे चिन्नाबाई को हराया है। सरिता कुडेम बड़े नेताओं के संपर्क में भी हैं।
उपाध्यक्ष की दौड़ में
सबसे पहला नाम नीलम गनपत का है, वही रीना भगत और तनुजा कुमार का नाम भी आगे है। नीलम गणपत पिछले 35 सालों से भाजपा में सक्रिय रहकर काम कर रहे है, भाजपा मंडल अध्यक्ष सहित कई पदों में भी थे, भाजपा से समर्थन नही मिलने से निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत हासिल की। उनका नाम आगे हैं। वे भी भाजपा के बड़े नेताओं के संपर्क में हैं।