बस्तर में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। डोंगाघाट में भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से हवाई रेस्क्यू शुरू किया गया है। अब तक 805 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि 42 राहत शिविरों में 4,798 प्रभावितों ने शरण ली है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बाढ़ के प्रकोप से स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। बाढ़ से घिरे इलाकों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है। रविवार सुबह तक प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 805 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। इसके साथ ही बेघर हुए करीब पांच हजार लोगों ने जिले में स्थापित 42 राहत शिविरों में शरण ली है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों की जान बचाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता बनी हुई है।
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सेना का हवाई बचाव अभियान
बाढ़ के कारण डोंगाघाट क्षेत्र जलमग्न हो गया है और वहां कई लोग पानी के बीच फंस गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने डोंगाघाट में हवाई रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सेना के हेलीकॉप्टर ने मौके पर पहुंचकर बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने का कार्य संभाला। शुरुआती चरण में हेलीकॉप्टर की मदद से 10 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इसके बाद भी डोंगाघाट सहित आसपास के प्रभावित इलाकों में फंसे अन्य लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर से बचाव अभियान लगातार जारी रखा गया है।
मकान ढहे और राजमार्ग पर शरण
कुड़कानार क्षेत्र में बाढ़ के पानी से भारी नुकसान हुआ है। इस इलाके में कई कच्चे मकान बाढ़ की चपेट में आने के कारण ढह गए। अपने मकान ढह जाने से बेघर हुए बड़ी संख्या में लोग अपने घरेलू सामान के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे शरण लेने को मजबूर हैं। सड़क किनारे डटे इन लोगों में महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। कई परिवार बीती रात से ही राजमार्ग के किनारे खुले में समय बिता रहे हैं और पानी का स्तर कम होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने घरों की ओर लौट सकें।
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राहत शिविरों में व्यवस्थाएं
जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों को ठहराने के लिए जिले में कुल 42 राहत शिविरों का संचालन शुरू किया है। इनमें से सात शहरी राहत शिविरों में 1,808 लोगों को रखा गया है, जबकि 35 ग्रामीण राहत शिविरों में 2,990 प्रभावितों को ठहराया गया है। शिविरों में 4,798 लोग शरण लिए हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन कई जगह अब भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। प्रशासन लगातार निगरानी रख रहा है और शिविरों में भोजन तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।