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छत्तीसगढ़ में अब तक का सबसे बड़ा माओवादी सरेंडर: 103 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण,एक करोड़ से ज्यादा का था इनाम

Thu, 02 Oct 2025 07:35 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर

सार

दशहरा पर्व के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें 49 इनामी थे और कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
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103 नक्सलियों ने किया समर्पण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले से एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। गुरुवार को यहां कुल 103 नक्सलियों ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इनमें से 49 नक्सली इनामी हैं, जिन पर कुल  1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था। बड़ी और खास बात ये है कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में अब तक का ये सबसे बड़ा माओवादी आत्मसमर्पण है। इससे नक्सल संगठन को गहरा चोट पहुंचा है। सरेंडर करने वालों में नक्सल संगठन के उच्च पदों पर बैठे नेता शामिल हैं। इनमें से 49 पर कुल 1.06 करोड़ रुपये का इनाम था, जो संगठन के आंतरिक मतभेद, सुरक्षा बलों के दबाव और पुनर्वास नीति के प्रभाव को दर्शाता है।  
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इन्होंने किया सरेंडर
1 डीवीसीएम (दक्षिण सब जोनल ब्यूरो कम्युनिकेशन कमांडर)
4 पीपीसीएम,
4 एसीएम
1 प्लाटून पार्टी सदस्य,
3 डीएकेएमएस अध्यक्ष
4 सीएनएम अध्यक्ष,
2 केएएमएस अध्यक्ष
5 एरिया कमेटी सदस्य,
5 मिलिशिया कमांडर/डिप्टी कमांडर
4 जनताना सरकार अध्यक्ष
1 पीएलजीए सदस्य
12 सीएनएम सदस्य
4 जनताना सरकार उपाध्यक्ष
1 डीएकेएमएस उपाध्यक्ष
22 जनताना सरकार सदस्य
23 मिलिशिया प्लाटून सदस्य
2 जीपीसी
4 डीएकेएमएस सदस्य
1 भूमकाल मिलिशिया सदस्य


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50 हजार-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक बांटे 
इन सभी को सरकार की पुनर्वास व आत्मसमर्पण नीति के तहत  50,000- 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए गए। बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव ने इस मौके पर कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सलियों को मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के परिजन भी चाहते हैं कि वे सामान्य और सम्मानजनक जीवन जिएं। उन्होंने नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि भ्रमित विचारधाराओं को त्यागें और निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें।

इधर, मुठभेड़ में एक नक्सली ढेर, हथियार और विस्फोटक बरामद
जिले के गंगालुर थाना क्षेत्र में आज सुबह से सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच रुक-रुककर हो रही मुठभेड़ में एक नक्सली मारा गया है। वहीं घटनास्थल से नक्सली का शव, हथियार, विस्फोटक सामग्री और अन्य नक्सल सामग्री बरामद की गई है।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान गुरुवार की सुबह करीब 11 बजे से गंगालूर थाना क्षेत्र में नक्सलियों और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम के बीच रुक-रुक कर फायरिंग शुरू हो गई, जो अब तक जारी है।

पुलिस ने बताया कि मुठभेड़ स्थल से एक नक्सली का शव बरामद किया गया है। साथ ही मुठभेड़ स्थल से हथियार और बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी मिली है। यह ऑपरेशन अभी भी जारी है।
सुरक्षा कारणों से फिलहाल मुठभेड़ के स्थान, ऑपरेशन में शामिल बलों की संख्या और अन्य संवेदनशील जानकारियों को साझा नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन खत्म होने के बाद पूरी जानकारी साझा की जाएगी।

 
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"आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025" और "नियद नेल्लानार योजना" ने जगाया विश्वास का दीप
इस मामले में सीएम साय ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि धर्म और न्याय की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पावन पर्व आज प्रदेश में हिंसा और भ्रम के अंधकार पर विकास और सुशासन की विजय का भी प्रतीक बन गया। हमारी सरकार की "आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025" और "नियद नेल्ला नार योजना" ने लाल आतंक के भ्रम से भटके लोगों के दिलों में विश्वास का दीप जलाया है। "पूना मारगेम अभियान" से प्रेरित होकर बीजापुर में कुल 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में से 49 नक्सली वे भी हैं, जिन पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपए तक के इनाम घोषित थे। आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को नई शुरुआत के लिए 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है तथा नक्सल उन्मूलन नीति के तहत उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
 

अब तक 1890 से अधिक माओवादी मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं यह हमारी नीतियों की प्रभावशीलता और जनता के विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में हमारा संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन कर, आत्मसमर्पित लोगों को सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्ज्वल भविष्य दिया जाए। यह परिवर्तन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य की ओर एक सशक्त कदम है।

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