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मांझी से कम नहीं है भिलाई का ट्री मैन, खुद ही पढ़ें कारनामा

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पहाड़ का सीना चीर कर रास्ता बना देने वाले दशरथ मांझी की तरह ही दुर्ग के रहने वाले गेंदालाल देशमुख का कारनामा हर किसे के लिए प्रेरणा का सबब बन सकता है।
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दुर्ग तहसील के कोडिया गांव निवासी 82 साल के गेंदालाल देशमुख को उनके जज्बे और विलक्षण काम के लिए लोग ट्री मैन के नाम से जानते हैं। अपने हाथों से क्षेत्र में हजारों पेड़ लगाने वाले गेंदलाल जिदंगी के छह दशक इसी काम में लगा चुके हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार देशमुख इस बारे में बात करने पर कहते हैं मूले ब्रह्मा, त्वचा विष्णु, शाखा रुद्रा माहेश्वरा; पत्ती पत्ती देव नाम नमस्तुते नमस्तुते। अपनी उम्र्र के तीन चौथाई साल पेडों की सेवा में लगा देने वाले देशमुख यहां के क्षेत्रीय कुर्मी समाज से आते हैं।
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अपने परिवार के साथ एक छोटी सी झोपड़ी में रहने वाले गेंदलाल ने पर्यावरण प्रेमियों के सामने नायाब उदाहरण पेश किया है।

सड़कों के किनारों पर लगाए फलदार वृक्ष

बताते हैं कि जिदंगी के 62 साल गेंदलाल ने हजारों छायादार जिनमें फलों के भी काफी पेड़ को लगाने में खपा दिए। गेंदलाल ने अपने अथक परिश्रम से अकेले दम लगभग पांच एकड के बंजर मैदान को बियाबान जंगल में तब्दील कर दिया।

गेंदलाल ने कोडिया से भानपुरी जाने वाले 9 किलोमीटर लंबे रास्ते पर 350 से ज्यादा पेड़ जो अब शानदार छाया देते हैं खुद ही लगाए थे। हाल फिलहाल वे भानपुरी से अंदा गांव जाने वाले 6 किलोमीटर लंबे मार्ग पर अकेले ही वृक्षारोपण का बीड़ा उठाए हुए हैं।

आलम ये है कि उस पूरे क्षेत्र में जो अब ज्यादातर छायादार पेड़ दिखाई देते हैं उनमें से अधिकतर गेंदालाल के ही लगाए हुए होते हैं। इसके साथ गेंदलाल पिछले 20 सालों से औषधीय पौधों का उपयोग करके घायल और बीमार लोगों का पारंपरिक इलाज करने का काम भी करते हैं।

प्राइमरी स्कूल के बाद ही शिक्षा छोड़ देने वाले गेंदलाल देशमुख बढ़ने और बचाने के लिए पारंपरिक बुनियादी पद्धति का उपयोग करते हैं।
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दस साल की उम्र में छोड़ी पढ़ाई लगाए पेड़

अपने जुनून के बारे में देशमुख ने बताया कि हमारे क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण अक्सर जलभराव की स्थिति रहती थी जिसका इलाज ये था कि यहां ज्यादा से ज्यादा पौधे लगा दिए जाएं जिससे पेडों की जड़ें पानी को सौखती रहें।

देशमुख के इस जुनून की शुरूआत उस समय हुई थी जब मात्र दस साल की उम्र में उन्हें कक्षा चार के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था।

वो बताते हैं कि खेती से अलग मैंने शुरूआत में नीम, शिवा बाबुर, आम और पीपल के पेड़ अपने घर के आसपास लगाए थे। ये पेड़ जैसे जैसे बड़े होते रहे वो मुझे पैसे कमाने से ज्यादा तसल्ली देते थे।
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