इंद्रावती नदी परियोजनाओं का ब्योरा
सिंचाई और जल भंडारण: बस्तर जिले में दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल है। 2018 तक जल संसाधन विभाग ने 75 योजनाओं के जरिए 32 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा विकसित की थी।
कांग्रेस सरकार का रिकॉर्ड: 2019-23 के बीच कांग्रेस सरकार ने 141 योजनाओं को बजट में शामिल किया, लेकिन केवल 25 योजनाओं को मंजूरी मिली, जिनमें से मात्र पांच पूरी हुईं। इससे केवल 285 हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता बढ़ी।
वर्तमान सरकार की उपलब्धियां: 2024 में भाजपा सरकार ने 15 योजनाओं की निविदा जारी की और 2024-25 में 80 योजनाओं को बजट में शामिल कर 52 योजनाओं को 200 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी। इससे 12 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी।
आगामी योजनाएं: 2025-26 में 65 योजनाओं का सर्वेक्षण शुरू हो चुका है। मटनार, देउरगांव, और महादेवघाट बैराज सहित कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनसे 50 टीएमसी जल भंडारण और 35 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा मिलेगी।
इंद्रावती-महानदी नदी जोड़ो परियोजना
बस्तर संभाग को 372 टीएमसी जल आबंटित है, लेकिन केवल 5 प्रतिशत जल भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इसके लिए इंद्रावती-महानदी नदी जोड़ो परियोजना का सर्वेक्षण स्वीकृत किया गया है, जिससे 4 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा विकसित होगी। 15 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री ने बस्तर में सिंचाई परियोजनाओं को गति देने के लिए नए मुख्य अभियंता कार्यालय का शुभारंभ किया।
इंद्रावती-जोरानाला जल संकट का समाधान
पृष्ठभूमि: 2010-16 के बीच 49 करोड़ रुपये की लागत से ओडिशा के जल संसाधन विभाग ने कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाया, जिससे छत्तीसगढ़ को 50 प्रतिशत जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई।
कांग्रेस के कार्यकाल में लापरवाही: 2021-23 के बीच सिल्ट और बोल्डर जमा होने से जल उपलब्धता घटकर 23% और 2024 में 16% रह गई, जिससे बस्तर में गंभीर जल संकट उत्पन्न हुआ। कांग्रेस सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
वर्तमान सरकार की पहल: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा के मुख्यमंत्री से चर्चा कर हाइड्रोलिक कंट्रोल स्ट्रक्चर के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जमा सिल्ट और अवरोधों को हटाने का अस्थायी समाधान किया, जिससे जल प्रवाह 16% से बढ़कर 49% हो गया।
स्थायी समाधान: ओडिशा सरकार ने चार करोड़ रुपये की लागत से जून 2025 तक सिल्ट और अवरोधों को स्थायी रूप से हटाने की सहमति दी है।
कांग्रेस का ढोंग उजागर
सांसद ने कहा कि जनता समझ चुकी है कि कौन इंद्रावती नदी के लिए काम कर रहा है और कौन केवल राजनीतिक स्टंट कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस की पदयात्रा को झूठा प्रचार और श्रेय लेने की कोशिश बताया।