Bastar LokSabha Election result 2024: छत्तीसगढ़ की बस्तर लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी महेश कश्यप ने जीत हासिल की है। उन्होंने 55 हजार 245 वोटों से जीत हासिल की है। कश्यप को 4 लाख 58 हजार 398 वोट मिले हैं। वहीं पूर्व मंत्री कवासी लखमा को 4 लाख 3 हजार 153 वोट मिले हैं। इस तरह जीत का अंतर 55 हजार 245 रहा। कुल वोट का प्रतिशत 45.5 रहा।
बस्तर लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दीपक बैज ने बीजेपी के बैदूराम कश्यप को कड़ी टक्कर देते हुए हराया था। बैदूराम कश्यप को 38 हजार 982 हजार वोटों से हराया था। दीपक बैज को 4 लाख 2 हजार 527 वोट यानी 44 फीसदी वोट मिले थे जबकि बैदूराम कश्यप को 3 लाख 63 हजार 545 यानी 40 फीसदी वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर सीपीआई के रामू राम थे। रामू को महज 38 हजार 395 वोट मिले थे।
बस्तर लोकसभा चुनाव 2014 का परिणाम
वर्ष 2014 में हुए चुनाव में करीब 12 लाख 98083 मतदाता थे। BJP प्रत्याशी दिनेश कश्यप ने कुल 3 लाख 85 हजार 829 वोट हासिल कर बाजी मारी थी। उन्हें 50।11 प्रतिशत वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर कांग्रेस उम्मीदवार दीपक कर्मा (बंटी), को 2 लाख 61 हजार 470 वोट मिले थे। कुल वोटों का 33.96 प्रतिशत था। इस सीट पर जीत का अंतर 1 लाख 24 हजार 359 था।
बस्तर लोकसभा चुनाव 2009 का परिणाम
साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में 11 लाख 93 हजार 116 मतदाता थे। उस समय बीजेपी उम्मीदवार बलिराम कश्यप ने 2 लाख 49 हजार 373 वोट पाकर जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 44.16 प्रतिशत वोट मिले थे। दूसरे स्थान पर कांग्रेस उम्मीदवार शंकर सोढ़ी थे, जिन्हें 1 लाख 49 हजार 111 वोट मिले थे। कुल वोटों का 26.4 प्रतिशत था।
बस्तर लोकसभा सीट में कुल मतदाता
बस्तर लोकसभा सीट पर करीब 13 लाख 57 हजार 443 लाख वोटर्स हैं। इनमें से 6 लाख 53 हजार 620 लाख पुरुष वोटर्स हैं, जबकि 7 लाख 3 हजार 779 महिला मतदाता हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में 9 लाख 12 हजार 846 मतदाताओं ने मतदान किया था। मतलब यहां 70 फीसदी वोटिंग हुई थी।
चुनावी मुद्दे...
जातीय समीकरण
बस्तर की राजनीति में भतरा और गोंड समुदायों का प्रभाव रहा है। हल्बा और अन्य आदिवासी जातियों की मौजूदगी भी है, लेकिन मुख्य रूप से पूरी राजनीति भतरा आदिवासियों के इर्द गिर्द ही घूमती रहती है। बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर और इसके आसपास के इलाके में भतरा जनजाति का निवास है। भानपुरी के बलीराम कश्यप का परिवार भी इसी समुदाय से हैं। हालांकि आदिवासियों के बीच राजनीतिक विभाजन नहीं है पर चुनाव के दौरान समाज को साधना जरूरी हो जाता है। बस्तर में हल्बी, भतरी, गोंडी, दोरली, परजी, धुरवी आदि बोलियां बोली जाती हैं। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ चारों जगह की गोंडी में फर्क है। दोरली बीजापुर और सुकमा के उन इलाकों में बोली जाती है, जो आंध्र या तेलंगाना से सटे हैं। इन जातियों के साधने पर ही यहां से जीत संभव हो पाता है।
निर्दलीय मुचाकी कोसा का रिकॉर्ड बरकरार
बस्तर लोकसभा सीट पर अब तक की सबसे बड़ी जीत पहले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार मुचाकी कोसा की रही है। राजमहल समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी मुचाकी कोसा को वर्ष 1952 के चुनाव में कुल विधिमान्य मतों में से 83.05 प्रतिशत मत मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस के सुरती क्रिस्टैया को मात्र 16.95 प्रतिशत वोट मिले थे। मुचाकी कोसा को 1 लाख 77 हजार 588 मत और सुरती क्रिस्टा को 36 हजार 257 वोट मिले थे। मुचाकी ने 1 लाख 41 हजार 331 मत और 66.09 फीसद के भारी अंतर से जीत हासिल की थी। विधिमान्य मतों में एकतरफा रिकॉर्ड 83.05 मत आज तक कोई प्राप्त नहीं कर सका है।