छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की अवैध बिक्री और परिवहन पर रोक लगाने के लिए मत्स्य विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग ने इस अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से सात सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया है। यह टीम शहर के थोक और खुदरा मछली बाजारों में लगातार औचक जांच कर रही है। जांच के दौरान जहां भी यह प्रतिबंधित मछली पाई जा रही है, उसे तुरंत जब्त कर नियमानुसार नष्ट कराया जा रहा है। विभाग की निगरानी अब केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के निर्देश पर मछली की आवक से लेकर उसकी बिक्री तक की पूरी कड़ी पर नजर रखी जा रही है।
ट्रेन पार्सल से आवक की आशंका
मत्स्य विभाग की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि हावड़ा और कोलकाता मार्ग से आने वाली ट्रेनों के पार्सल के जरिये थाई मांगुर मछली बिलासपुर पहुंचाई जा रही है। असामाजिक तत्व सामान्य सामान की आड़ में इस प्रतिबंधित मछली की खेप लाकर स्थानीय बाजारों में खपाने की कोशिश कर रहे हैं। इस अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग से आने वाली ट्रेनों के पार्सल की जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग को आशंका है कि बाहर से आने वाली यह खेप स्थानीय आढ़तियों और परिवहन एजेंटों के माध्यम से बाजार तक पहुंच रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने बाजारों के साथ-साथ मछली की आवक के सभी सम्भावित रास्तों पर अपनी निगरानी कड़ी कर दी है।
रेलवे के साथ संयुक्त जांच अभियान
अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए मत्स्य विभाग अब रेलवे प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने की तैयारी में है। विभाग संदिग्ध पार्सल और माल की जांच के लिए रेलवे प्रशासन को पत्र लिखेगा। योजना के तहत रेलवे सुरक्षा बल और पार्सल विभाग के कर्मचारियों के साथ तालमेल स्थापित कर स्टेशन परिसर व पार्सल यार्ड में संदिग्ध खेप की संयुक्त जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त विभाग ने स्थानीय मछली कारोबारियों और परिवहन एजेंटों को नियमों का पालन करने की सख्त हिदायत दी है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध खेप को बिना जरूरी जांच और वैध दस्तावेज के स्वीकार न करें। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरण के लिए हानिकारक प्रजाति
थाई मांगुर मछली की एक ऐसी प्रजाति है, जिसके पालन और कारोबार पर भारत में पूर्ण प्रतिबंध लागू है। यह प्रजाति बेहद तेजी से बढ़ती है और स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। हालांकि, इस मछली के सेवन से होने वाले किसी विशेष स्वास्थ्य नुकसान या इसमें भारी धातुओं की अधिक मात्रा होने के दावों की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच या आधिकारिक रिपोर्ट आवश्यक है। हाल ही में बिलासपुर के शनिचरी बाजार में औचक जांच के दौरान बड़ी मात्रा में थाई मांगुर मछली पकड़ी गई थी, जिसे जब्त कर नियमानुसार नष्ट कर दिया गया।
सहायक मत्स्य अधिकारी योगेश मनवाटकर के अनुसार, कोलकाता से ट्रेनों के जरिये बिलासपुर लाई जा रही प्रतिबंधित मांगुर मछली की रोकथाम के लिए सात सदस्यीय टीम गठित की गई है। रेलवे प्रशासन से पत्राचार कर पार्सल के माध्यम से होने वाले अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि शहर के बाजारों में सघन जांच जारी है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।