बलरामपुर जिले के राधाकृष्णानगर ग्राम पंचायत के युवा किसान अंकित मंडल ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए खीरे की उन्नत खेती में सफलता का नया अध्याय लिखा है। अपनी मेहनत, दृढ़ संकल्प और आधुनिक कृषि तकनीकों के सहारे उन्होंने न केवल अच्छी आमदनी हासिल की, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बने हैं।
अंकित मंडल ने करीब छह-सात साल पहले अंबिकापुर क्षेत्र के एक गांव में खीरे की खेती होते देखा, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने भी इसे आजमाने का निर्णय लिया। शुरुआत में उन्होंने करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत से खीरे की खेती शुरू की। धीरे-धीरे अनुभव और मेहनत से उन्होंने उत्पादन में गुणवत्ता लाई और अब हर सीजन में उन्हें लगभग तीन से चार लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ होने लगा है। अंकित के खेतों में तैयार खीरे की आपूर्ति न केवल बलरामपुर की स्थानीय मंडियों में होती है, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों तक भी पहुंच रही है। बाजार में खीरे की बढ़ती मांग ने उन्हें स्थायी आय का भरोसेमंद जरिया उपलब्ध कराया है।
अंकित मंडल मानते हैं कि यदि किसान पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं और फसल चयन में समझदारी दिखाएं, तो खेती भी एक सफल व्यवसाय बन सकती है। उनकी सफलता से प्रभावित होकर आसपास के कई किसान अब खीरे की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। खेती के क्षेत्र में अंकित की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि जिले की प्रगतिशील कृषि की दिशा में एक सकारात्मक संकेत भी है।