बालोद जिले भर की हजारों मितानिन कार्यकर्ताओं ने आज पैदल मार्च निकालकर कलेक्ट्रेट के सामने धरना दिया इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी तीन सूत्री मांगों को पूरा करने की मांग की अपनी बातों को रखने के लिए उन्होंने कलेक्टर से बाहर आने की अपील की जिसके बाद स्थानीय विभागीय कर्मचारी अधिकारी उनकी बातों को सुनने के लिए पहुंचे परंतु मितानिनों ने उनकी एक भी बात नहीं सुनी बल्कि तेज बारिश और कड़ी धूप बदलते मौसम के बीच हजारों मितानिन कार्यकर्ताएं कलेक्ट्रेट के बाहर बैठे हुए हैं।
मितानिन चंद्रप्रभा सुधाकर ने कहा कि सरकार ने अब तक अपने वादों को पूरा नहीं किया है। मितानिन, प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर और कोऑर्डिनेटर को NHM (नेशनल हेल्थ मिशन) के अंतर्गत शामिल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हुई। इसी नाराज़गी के चलते मितानिन अब आंदोलनरत हैं वहीं सारिका मेहर ने बताया कि NHM के तहत सभी को शामिल और वादों का तत्काल पालन मितानिनों के कार्य का उचित सम्मान और सुरक्षा सहित अन्य विषय पूरे आंदोलन का मुख्य बिंदु है आपको बता दें कि मितानिन हजारों की संख्या में यहां पर पहुंचे हुए हैं।
ये कैसी व्यवस्था
मितानिन सुरेखा साहू ने कहा कि पहले हमें NGO के तहत काम करने के लिए मजबूर किया जाता था, लेकिन अब हम इस व्यवस्था को नहीं मानेंगे वहीं मितानिन मीना डोंगरे ने कहा कि हमारी मांग है कि हमें सीधे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत शामिल किया जाए. यदि हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो हम आगे चलकर उग्र आंदोलन करेंगे सभी मितानिन धरना स्थल पर डटे हुए थे इस दौरान शासन प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा गया है।
मोदी की गारंटी का क्या हुआ
आंदोलन कर रही मितानिन कार्यकर्ताओं ने बताया कि सरकार बनने से पहले विष्णु देव सहायक की सरकार ने अपने मोदी की गारंटी नमक घोषणा पत्र में 72000 मिटाने के सभी नियम सहित कई तरह के महत्वपूर्ण वादे किए थे परंतु आज सट्टा उनकी है डबल इंजन सरकार है बावजूद इसके आखिर क्यों हम मितानिनों को दरकिनार किया जा रहा है क्यों हमें स्वयं सेवी संस्थाओ को सौप जा रहा है ऐसी स्थिति में तो हम काम नहीं कर पाएंगे।