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Chhattisgarh उफान पर तांदुला जलाशय, सैलानियों की लगी भीड़, बालोद में खुशहाली का माना जाता है प्रतीक

Wed, 03 Sep 2025 03:35 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, बालोद

सार

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में तांदुला जलाशय भारी बारिश के बाद 39 फीट तक भरकर छलक रहा है, जिसे देखने दूर-दूर से सैलानी पहुंच रहे हैं। यह जलाशय क्षेत्र की सिंचाई, पेयजल, और भिलाई इस्पात संयंत्र की जरूरतों को पूरा करता है।  
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तांदुला जलाशय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंचल के लिए खुशहाली का प्रतीक माना जाने वाले बालोद जिले की जीवन दायिनी तांदुला जलाशय बीते सप्ताह भर से हो रही बारिश के बाद से छलकने लगा है। जलाशय में 39 फीट तक जलभराव हुआ है। और लोग दूर दूर से देखने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं नदी में अब पानी आने से नदी की सफाई भी प्रशासन द्वारा शुरू कर दी गई है। इससे पहले वर्ष 2022 में यह नजारा लोगों को देखने के लिए मिला था। दूर-दूर से लोग यहां पहुंच रहे हैं।

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सेवानिवृत्ति अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि काफी सुख और समृद्धि का यह प्रतीक है। काफी अच्छा लग रहा है कि हम आज ओवरफ्लो देखने के लिए आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि यादें ताजा हो गई, जब बचपन में हम यह अच्छा लगता था। इसी जगह पर खेल खेलने आते थे। अब काफी सारे लोग इसे देखने आए हैं। सबको इसके बारे में जानना जरूरी है। कुलदीप यादव ने बताया कि जब-जब यह अच्छा लगता है तब तक साल भर वाटर लेवल बना रहता है। नदियों की साफ सफाई होती है। ऐसा कह सकते हैं कि यह एक जीवनदायनी है और यह बालों भी नहीं भिलाई इस्पात संयंत्र सहित अन्य जगहों के लिए भी एक बड़ा सिंचाई और पेयजल का माध्यम है।

जानें कब-कब हुआ ओवरफ्लो 
तांदुला जलाशय कई बार ओवरफ्लो हुआ है। जिनमें अगस्त 2013 में 38.70 फीट, अगस्त 2014 में 38.80 फीट, और अगस्त 2018 में 38.50 फीट पानी भरने पर ओवरफ्लो हुआ था। सबसे हालिया ओवरफ्लो अगस्त 2022 में हुआ था। जिसके बाद अगस्त 2023 में यह फिर से ओवरफ्लो होने के कगार पर था। अब 2025 के सितंबर महीने में यह ओवरफ्लो हुआ है।
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बालोद जिले में तांदुला और सूखा नाला नदियों के संगम पर स्थित एक प्रमुख जलाशय है, जिसका निर्माण 1905 से 1912 के बीच ब्रिटिश अभियंता एडम स्मिथ के मार्गदर्शन में किया गया था। यह बालोद जिले की जीवनदायिनी है, जो दुर्ग और भिलाई को पेयजल आपूर्ति करती है, साथ ही भिलाई इस्पात संयंत्र की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करती है और लगभग 23,000 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई करती है। यह बांध बाढ़ नियंत्रण में भी भूमिका निभाता है और अपने सौंदर्य के कारण एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा चुका है इसकी जलग्रहण क्षेत्र 827.2 वर्ग किलोमीटर में है तो वहीं इस जलाशय में क्षमता 302.31 मिलियन क्यूबिक मीटर है।
 

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