सचिव हड़ताल से ठप्प पड़े कामकाज
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बालोद जिले भर के सचिव हड़ताल पर हैं और इसका सबसे ज्यादा नुकसान सरपंचों को उठाना पड़ रहा है जिन्होंने चुनाव तो लड़ा लेकिन पदभार ग्रहण करते ही उनके सचिव हड़ताल पर चले गए इसके बाद से सरपंचों को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि वह आखिर करें क्या पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ाई हुई है और सरपंच भी दिवस हैं क्योंकि सचिन बिना वे न कम कर पा रहे हैं ना ही ग्राम वासियों के लिए किसी तरह की कोई मदद सरपंच अपने हड़ताल को लेकर लगातार बदलाव कर रहे हैं अब वह क्रमिक भूख हड़ताल पर हैं ऐसे में कुछ सरपंचों ने यह भी कहा कि सचिवों की मांगों को मान लेना चाहिए।
स्त्री स्तरीय पंचायत निर्वाचन के बाद से पंचायत में दो तरह के सरपंच चुने गए जिसमें एक वह सरपंच थे जो पहले और सरपंच रहते हुए कार्य भारत संभाल चुके हैं उनको पंचायत में काम करने का तौर तरीका पता है तो वह जैसे तैसे पंचायत में संघर्ष कर पा रहे हैं लेकिन एक दूसरी तरह के सरपंच वह भी हैं जो पहली बार चुनाव जीतकर आए हैं और उन्हें नहीं पता कि कहां कैसे खर्च करें या फिर कौन सा काम कहां करना है जो कि सचिन के जिम में रहता है तो उन सरपंचों के लिए यह समय चलेंगे से भरा हुआ है उन्हें अब तक पंचायती करने का मौका ही नहीं मिल पाया है।
लोग रोज आ रहे हैं घर, नहीं कर पा रहे काम
बोहारडीह पंचायत के सरपंच राजेंद्र साहू कहते हैं कि मैं पहली बार सरपंच निर्वाचित हुआ हूं और मुझे कामकाज का कोई भी अनुभव नहीं है गांव के लोग रोजाना मेरे घर आते हैं प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए भी सर्वे का काम मैं खुद ही कर रहा हूं उन्होंने बताया कि गांव में मूलभूत कई सारी चीज रहती है छोटे-मोटे काम करवाने हैं जिसके लिए बिल इत्यादि की आवश्यकता होती है तो यह सब काम कर पाने में हम असमर्थ हैं।
आम जनता की समस्या रह गई धरी
ग्राम भीमकंहार की सरपंच अश्विनी बाई ने बताया कि जैसे ही हम चुनाव जीत कर आए हैं इसके बाद से एक बार भी ग्राम सभा नहीं हुआ है, विवाह पंजीयन का काम है और पेंशन इत्यादि का काम है सब रुका हुआ है वहीं सरपंच ग्राम पंचायत भूलन डबरी के सरपंच डोमन लाल साहू ने बताया कि सचिव के हड़ताल से सब बंजर पड़ा हुआ है सरकार को कोई व्यवस्था ऐसी भी बनानी चाहिए जहां सचिव के बिना भी सरपंच काम कर पाए।