बालोद कलेक्टर ने बच्चों के साथ लंच कर बांटे अपने अनुभव।
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'मैं 10 वी में पढ़ाई में कमजोर था। 11वीं में गया तो मुझसे ज्यादा 80 से अधिक प्रतिशत वाले बच्चे थे, पर मैने हार नहीं मानी। आगे बढ़ता गया। फिर UPSC क्लीयर किया और उच्च प्रतिशत वाले बच्चे पीछे हो गए। असफलता या एक-दो नंबर हमारा व्यक्तित्व नहीं तय कर सकते। लोग आपके सपनों का मजाक बनाएंगे, लेकिन तटस्थ रहना है।' ये कहना है कि IAS और छत्तीसगढ़ में बालोद जिला कलेक्टर कुलदीप शर्मा का। उन्होंने शुक्रवार को CGBSE (छत्तीसगढ़ बोर्ड) के टॉपर्स को कलेक्ट्रेट सभागार बुलाया, साथ में लंच किया और अपने अनुभव भी उनके साथ बांटे।
लोग सपनों का मजाक बनाएंगे, पर तटस्थ रहना
बच्चों, उनके पैरेंट्स और शिक्षकों के साथ लंच की टेबल पर बैठे कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने अपने जीवन की सच्चाइयों, अनुभवों से उन्हें रूबरू कराया। बच्चों को प्रोत्साहित किया। इस दौरान पांच बच्चों ने बताया है कि उन्हें भी आईएएस बनना है। इस पर कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने कहा कि, मैं छत्तीसगढ़ में हूं और इस कुर्सी पर अभी मैं बैठा हूं। उसी कुर्सी पर मैं आप सभी को 10 साल बाद देखना चाहता हूं। असली कठिनाई तो अब आएगी। आपको बेहतर डिसीजन लेने होंगे। लोग आपके सपनों को लेकर मजाक उड़ाएंगे, लेकिन आपको तटस्थ रहकर अपने लक्ष्य में आगे बढ़ाना है। प्रतिशत कोई मायने नहीं रखता।
अब शुरू होगी असली मेहनत
कलेक्टर शर्मा ने कहा कि असफलता या एक दो नंबर हमारा जीवन और हमारा व्यक्तित्व तय नहीं करता। हमारा व्यक्तित्व सदैव ऐसा ही रहना चाहिए जैसा आज है। फिर परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों। हम जब अध्ययन करते हैं, तब हमारा व्यक्तित्व जैसा है और परिणाम आने के बाद हमारा व्यक्तित्व क्या बन जाता है, यह हमारे ऊपर निर्भर करता है। जब मैं पढ़ता था, तब भी वैसा ही था और आज जब कलेक्टर बन गया हूं तब भी मैं वैसा ही हूं। आईएएस शर्मा ने कहा कि, आज हम बेहतर ढंग से आपके साथ बैठकर भोजन कर पा रहे हैं यह होती है सिविल सर्विसेज की क्षमताएं।
जब सिविल सर्विसेज में होते हैं, तो बहुत अच्छा अनुभव होता है
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने कहा कि आज हम दो रुपये किलो गोबर से लेकर सारे इंफ्रास्ट्रक्चर चाहे 200 करोड़ के क्यों ना हो, उसका काम देख रहे हैं। यह होती है पावर। हम जब सिविल सर्विसेज में होते हैं तो बहुत अच्छा अनुभव होता है। आप सब सिविल सर्विसेस को लेकर बेहद जागरूक हैं, सतर्क हैं और सपना संजोए बैठे हैं। ये हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात है। फिलहाल बालोद जिले के इतिहास में ऐसा नजारा पहली बार देखने को मिला, जब कलेक्ट्रेट सभागार में बच्चों के लिए टेबल लगे। बच्चों ने कलेक्टर के साथ बैठकर भोजन किया और अफसर ने अपने अनुभवों को उनसे साझा किया।