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बालोद: कन्वर्टेड ईसाइयों ने मांगा अलग से कब्रिस्तान, विहिप ने जताया विरोध, धर्मांतरण को लेकर फिर से तनाव

Mon, 17 Nov 2025 07:19 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद

सार

बालोद जिले में एक बार फिर धर्मांतरण और अंतिम संस्कार के अधिकार को लेकर तनाव की स्थिति बन गई है। बालोद में बड़ी संख्या में कन्वर्टेड ईसाइयों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपने समाज के लिए अलग कब्रिस्तान की माँग की है।
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कन्वर्टेड ईसाइयों ने मांगा अलग से कब्रिस्तान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बालोद जिले में एक बार फिर धर्मांतरण और अंतिम संस्कार के अधिकार को लेकर तनाव की स्थिति बन गई है। बालोद में बड़ी संख्या में कन्वर्टेड ईसाइयों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपने समाज के लिए अलग कब्रिस्तान की माँग की है, जिसके विरोध में विश्व हिंदू परिषद ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि ज़मीन आवंटित की गई तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।

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प्रताड़ना का हवाला, जवरतला की घटना बनी आधार
मसीही समाज के लोगों ने अपनी माँग के पीछे हाल ही में गुरूर ब्लॉक के जवरतला गाँव में हुई घटना का हवाला दिया है। समाज के प्रतिनिधि तोमर राम ने बताया कि हिंदी धर्म छोड़कर ईसाई बने एक व्यक्ति की मृत्यु पर उसे गाँव में दफनाने नहीं दिया गया था, जिसके चलते तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हुई और मारपीट तक की नौबत आ गई थी।

तोमर राम ने कलेक्ट्रेट में कहा, "प्रशासन ने उस समय अलग से ज़मीन दिलाने का वादा किया था, लेकिन आज तक हमें कोई ज़मीन उपलब्ध नहीं कराई गई। मसीह में आने के बाद से हमें हर बार प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।" एक अन्य सदस्य, पुनेश्वर कुमार, ने सवाल उठाया कि एक विश्वासी की मृत्यु पर विरोध करना कहाँ का न्याय है और उनके मौलिक अधिकार कहाँ गए।
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विहिप ने बताया प्रोपेगेंडा
विश्व हिंदू परिषद ने कन्वर्टेड ईसाइयों की इस माँग को पूरी तरह से निराधार बताते हुए इसे मतांतरण का प्रयास करार दिया है।VHP के कोषाध्यक्ष राज सोनी ने कहा, "यह कुछ कन्वर्टेड क्रिश्चियन द्वारा फैलाया जा रहा झूठ प्रोपेगेंडा है। जो वास्तविक ईसाई हैं, उनके लिए बालोद जिले में पहले से ही आवश्यक जगहों पर कब्रिस्तान का निर्माण किया जा चुका है।" उन्होंने आरोप लगाया कि यह माँग सिर्फ भटकाने वाला मामला है। VHP पदाधिकारी उमेश सेन ने Convert हो चुके लोगों की पहचान पर सवाल उठाते हुए कहा, "जो कन्वर्टेड हैं और आज भी हिंदू धर्म के अपने जाति और धर्म को लिखते हैं, वे आखिर कब से ईसाई धर्म के हो गए?" उन्होंने प्रशासन को खुली चेतावनी दी कि यदि उनकी माँग पर ज़मीन उपलब्ध कराई जाती है तो विहिप के सभी विभाग एकजुट होकर सड़क तक उतरकर लड़ाई लड़ेंगे।

पहले भी आया था मामला
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले बालोद जिले के हीरापुर गाँव में भी कुछ परिवारों ने इसी तरह अलग कब्रिस्तान की माँग की थी। उस समय भी हजारों हिंदू एकत्र हुए थे और शहर में विशाल प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद यह मामला शांत हो गया था।मौजूदा स्थिति को देखते हुए, प्रशासन के सामने धर्मांतरण और कब्रिस्तान की ज़मीन आवंटन को लेकर एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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