बालोद जिले में बिजली बिल हाफ योजना बंद होने के फैसले के खिलाफ आज छत्तीसगढ़िया क्रांति सेवा एवं जोहार छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ताओं ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान रैली निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कार्यकर्ताओं का आरोप
जिला संयोजक चंद्रभान साहू ने बताया कि बिजली बिल के कारण आम जनता की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से बिगड़ती जा रही है। छत्तीसगढ़ सरप्लस बिजली वाला राज्य है, जहां जल, जंगल और जमीन जैसे संसाधनों की भरमार है। यहां कोयले से बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन होता है, लेकिन उसका लाभ केवल उद्योगपतियों तक ही सीमित है। प्रदेश के मूल निवासियों को अगर बिजली मिल रही है तो भी भारी दरों पर, जबकि उन्हें न्यूनतम दर पर बिजली उपलब्ध कराई जानी चाहिए।प्रदेश सचिव शशिभूषण चंद्राकर ने कहा कि सरकार स्थानीय जनता के हक का दोहन कर रही है। प्रदेश के संसाधनों पर उद्योगपतियों का कब्जा है और आम जनता को महंगे बिजली बिल थमा दिए गए हैं। यह सीधा जनता पर बोझ है, जिसके खिलाफ हम सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं।
सरकार के खिलाफ नारेबाजी
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों को जिम्मेदार ठहराते हुए नारे लगाए और कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से आंखें मूंद रही है। पहले ही महंगाई से जूझ रहे लोगों पर अब बिजली के भारी-भरकम बिलों का बोझ पड़ रहा है।आम जनता पर असरबिजली बिल हाफ योजना बंद होने के बाद उपभोक्ताओं के बिलों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। कई उपभोक्ताओं के बिल 3 से 4 गुना तक बढ़ गए हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। आम जनता अब महंगाई के साथ-साथ महंगे बिजली बिलों की मार भी झेलने को मजबूर है।