पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में सबसे पहला मतदान छत्तीसगढ़ में 12 नवंबर को होगा। चुनाव के मद्देनजर सियासी हलचल तेज हो गई है। तमाम राजनीतिक पार्टियों के नेता मंदिर और मठों में पहुंच रहे हैं। इसमें भाजपा, कांग्रेस के अलावा जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के नेता भी शामिल हैं जो इस चुनावी माहौल में मंदिरों में मत्था टेक रहे हैं। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि इस बार विधानसभा चुनाव में जीत का मंत्र मंदिरों से मिलेगा या फिर मंदिर के बहाने स्थानीय वोटरों को लुभाने की कवायद शुरू हो रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर थे। इस सियासी दौरे में उन्होंने मां बमलेश्वरी देवी के दर्शन किए थे उसके बाद जगदलपुर स्थित दंतेश्वरी माता के भी दर्शन किए। शाह के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह भी दंतेश्वरी मंदिर पहुंचे थे।
चुनावी माहौल में मंदिरों की दर पर पहुंचकर नेता जनता के बीच क्या संदेश देते हैं। धर्म और सियासत के इस खेल में सिर्फ भाजपा ही एकमात्र खिलाड़ी नहीं है। कांग्रेस के नेता भी इसमें पीछे नहीं दिखना चाहते। कांग्रेस के नेता भी इस चुनावी माहौल में मंदिरों के दर पर पहुंच रहे हैं।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी पीएल पुनिया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह देव भी अभी हाल में ही बमलेश्वरी देवी के दर्शन करने डोंगरगढ़ पहुंचे थे। वहीं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने राहुल गांधी का जो चुनावी दौरा तय किया है उसमें यह माना जा रहा है कि राहुल गांधी जिन इलाकों में चुनाव प्रचार करेंगे वहां के स्थानीय मंदिरों में दर्शन भी करेंगे।
हालांकि भाजपा कांग्रेस पर लगातार यह आरोप लगाती रही है कि कांग्रेस पार्टी के नेता सिर्फ चुनावी माहौल में मंदिरों में दर्शन करने पहुंचते हैं। लेकिन यह पहला मौका नहीं है कि कांग्रेस और भाजपा के नेता मंदिरों में पहुंच रहे हों।
इसके पहले भी गुजरात चुनाव में देखा गया है कि कांग्रेस के साथ ही भाजपा के कई बड़े नेता मंदिरों में दर्शन करने पहुंचे। जिसका दोनों ही पार्टियों को सियासी फायदा हुआ। अब ऐसे में देखना यह होगा छत्तीसगढ़ में क्या देवी के दर्शन से भाजपा चौथी बार सत्ता में पहुंचेगी या फिर देवी कांग्रेस का सत्ता का वनवास खत्म कराएगी।