कोंटा थाना क्षेत्र के ढोंढरा में हुए आईईडी विस्फोट में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश राव शहीद हो गए, जबकि डीएसपी और थाना प्रभारी गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने उसी स्थान से एक और प्रेशर आईईडी बरामद किया, जिसे फोरेंसिक और बीडीएस टीम ने सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर दिया।
फोरेंसिक टीम ने विस्फोटक के नमूने एकत्र किए हैं। जांच में पता चला कि नक्सलियों ने दो-तीन किलो वजनी प्रेशर आईईडी का उपयोग किया था। बरामद दूसरा आईईडी भी लगभग दो किलो का था। नक्सलियों द्वारा प्रेशर आईईडी का इस्तेमाल सुरक्षा बलों के खिलाफ बढ़ता जा रहा है, क्योंकि वे प्रत्यक्ष टकराव से बच रहे हैं।
नक्सलियों की रणनीति और सवाल
पिछले दो वर्षों से नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। फिर भी उनके पास विस्फोटक सामग्री कैसे पहुंच रही है? क्या उनका शहरी नेटवर्क या सप्लाई चेन अभी भी सक्रिय है या पुराने विस्फोटक अभी भी प्रभावी हैं? ये सवाल जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए हैं।
प्रेशर आईईडी कैसे काम करता है?
फोरेंसिक और बीडीएस टीम के अनुसार, नक्सली 2-2.5 किलो के प्रेशर आईईडी का उपयोग करते हैं, क्योंकि भारी विस्फोटक समय पर काम नहीं करते। इनमें इंजेक्शन, स्प्रिंग और अन्य सामग्री का इस्तेमाल होता है। प्रेशर आईईडी को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि दबाव पड़ने पर विस्फोट हो।