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CG: इंडिगो फ्लाइट रद्द होने पर छत्तीसगढ़ में नाराज़गी बढ़ी, सिविल सोसाइटी ने कंपनी को थमाया कानूनी नोटिस

Tue, 09 Dec 2025 04:01 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

इसके साथ ही शिकायत की प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजकर इंडिगो पर करीब 9 हजार करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश भी की गई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख सिविल सोसाइटी संगठन ने इंडिगो एयरलाइंस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कंपनी को विधिक नोटिस जारी किया है। संगठन का आरोप है कि लगातार बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने से यात्रियों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। नोटिस में मांग की गई है कि जिन भी लोगों की टिकटें रद्द हुई हैं, उन्हें किराए की राशि का दस गुना मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही शिकायत की प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजकर इंडिगो पर करीब 9 हजार करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश भी की गई है।
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मंगलवार की सुबह रायपुर से मुंबई जाने वाली उड़ान अचानक रद्द कर दी गई। इसी तरह मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद से निकलने वाली चार अन्य उड़ानें भी नहीं उड़ीं। संभावना जताई जा रही है कि दिन भर और कई उड़ानें रद्द या देरी का सामना कर सकती हैं। सोमवार को स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही, जब रायपुर एयरपोर्ट से इंडिगो की आठ उड़ानें संचालित नहीं हो सकीं। इनमें दो मुंबई, दो हैदराबाद और बाकी बेंगलुरु, भोपाल, कोलकाता और दिल्ली की उड़ानें शामिल थीं। पिछले चार दिनों में केवल रायपुर से 64 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं, जबकि पूरे देश में पांच दिनों के भीतर तीन हजार से ज्यादा फ्लाइट्स बंद करनी पड़ी हैं।

यात्रियों का कहना है कि एयरलाइन और एयरपोर्ट दोनों की ओर से सही जानकारी नहीं दी जा रही है। कई लोगों ने शिकायत की कि रायपुर एयरपोर्ट डायरेक्टर तक फोन पर संपर्क भी नहीं हो पा रहा है, जिससे स्थिति और अधिक भ्रमित हो गई है।
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सिविल सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह स्थिति यात्रियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में फ्लाइट रद्द होने के बावजूद यात्रियों को पहले से कोई सूचना नहीं दी गई और न ही इसकी ठोस वजह बताई गई। नोटिस में दावा किया गया है कि इससे यात्रियों को होटल बुकिंग, यात्रा प्लान, आपात चिकित्सा यात्राओं और वैकल्पिक टिकटों पर भारी खर्च उठाना पड़ा है, जिससे उन्हें व्यापक आर्थिक और मानसिक नुकसान हुआ है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि पांच दिनों के भीतर यात्रियों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो वे कानूनी कार्रवाई को और आगे बढ़ाएंगे।
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