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आंतों से चिपका था 8 किलो का ट्यूमर: 46 वर्षीय महिला के पेट से निकला, तीन विभागों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन

Tue, 08 Sep 2026 04:03 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़

सार

शासकीय मेडिकल कॉलेज के तीन विभागों के चिकित्सकों के साझा दल ने एक 46 वर्षीय महिला के पेट से आठ किलोग्राम वजनी जटिल ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया।
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तीन विभागों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन - फोटो : अमर उजाला
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रायगढ़ जिले के शासकीय मेडिकल कॉलेज के तीन विभागों के चिकित्सकों के साझा दल ने एक 46 वर्षीय महिला के पेट से आठ किलोग्राम वजनी जटिल ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। ग्राम झलमला निवासी चंपा यादव एक महीने से पेट में असहनीय दर्द, अत्यधिक सूजन और उल्टी की समस्या से परेशान थीं। ट्यूमर आंतों से गहराई तक चिपका हुआ था, जिससे महिला की जान जोखिम में थी। मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग, जनरल सर्जरी तथा निश्चेतना विभाग की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया।
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पीड़ित महिला को 22 अगस्त को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। प्राथमिक जांच में महिला का रक्तचाप गिरकर 84/54 एमएमएचजी पर पहुंच गया था और शरीर में खून की भारी कमी पाई गई थी। सीटी स्कैन तथा अल्ट्रासाउंड जांच से पता चला कि पेट में मौजूद विशाल ट्यूमर के दबाव के कारण गर्भाशय अपनी जगह से खिसक गया था। बाईं मूत्रवाहिनी दबने के कारण गुर्दे पर असर पड़ रहा था और यकृत के मानक भी बिगड़ चुके थे।

मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने पहले उनका स्वास्थ्य स्थिर करने का फैसला लिया। खून की कमी दूर करने के लिए मरीज को कई यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल चढ़ाए गए। इसके साथ ही एंटीबायोटिक तथा अन्य आवश्यक उपचार देकर शरीर और अंगों की स्थिति को शल्य चिकित्सा के अनुकूल बनाया गया।
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मरीज की हालत स्थिर होने के बाद 1 सितंबर को जनरल एनेस्थीसिया के तहत शल्य क्रिया शुरू की गई। एक्सप्लोरेटरी लेपरोटॉमी के दौरान डॉक्टरों के सामने बड़ी चुनौती थी, क्योंकि ट्यूमर आंतों से गहराई से चिपका था। चिकित्सकों की टीम ने बेहद सावधानीपूर्वक ट्यूमर को आंतों से पृथक किया और दोनों मूत्रवाहिनियों को सुरक्षित रखते हुए गर्भाशय समेत आठ किलोग्राम वजनी ट्यूमर को बाहर निकाल लिया।

यह जटिल ऑपरेशन अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार और अस्पताल अधीक्षक डॉ.दुर्गाशंकर पटेल के निर्देशन में सं हुआ। शल्य चिकित्सा दल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉक्टर राघवेंद्र महिलांगे, डॉक्टर कुंती चौधरी, डॉक्टर अनीस भगत, निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉक्टर अशोक सिंह सिदार और सर्जरी विभाग के डॉक्टर निखिलेश शिंदे शामिल रहे। नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर है और वे स्वस्थ हो रही हैं।
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