फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीजी: अंबिकापुर में 1.32 करोड़ के कथित गबन का मामला, पूर्व सीईओ समेत 9 आरोपियों पर एफआईआर के आदेश

Tue, 13 Oct 2026 09:28 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अम्बिकापुर

सार

अंबिकापुर में स्वामी आत्मानंद महाविद्यालय के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण के लिए स्वीकृत 1.32 करोड़ रुपये में कथित गड़बड़ी के मामले में अदालत ने पूर्व सीईओ समेत नौ आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया है।

 

विज्ञापन
स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण कार्यों के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से स्वीकृत 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये की राशि में कथित गड़बड़ी के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने नगर कोतवाली थाना प्रभारी को पूर्व जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), उप अभियंताओं, सरपंच, सचिव और ठेकेदारों समेत नौ आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने आरटीआई कार्यकर्ता अभय नारायण पांडेय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत दायर आवेदन स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।

बिना निविदा प्रक्रिया के भुगतान का आरोप

विज्ञापन

महाविद्यालय परिसर में तीन अलग-अलग निर्माण और नवीनीकरण कार्यों के लिए 31 मार्च, 2023 को प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई थी। गार्डन के सुंदरीकरण और सीसी रोड निर्माण के लिए 33.24 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। प्रथम तल पर प्रयोगशाला और पुस्तकालय के नवीनीकरण तथा चहारदीवारी निर्माण के लिए 49.57 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। वहीं, भूतल पर प्राचार्य कक्ष और कार्यालय के नवीनीकरण के साथ वाहन पार्किंग शेड के निर्माण के लिए 49.52 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई थी। इन सभी कार्यों के लिए ग्राम पंचायत केशवपुर को निर्माण एजेंसी बनाया गया था।

निर्माण फर्म के दस्तावेज में उप अभियंता का मोबाइल नंबर
आवेदक के अनुसार, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने खुली निविदा प्रक्रिया अपनाए बिना ही मेसर्स अनन्या कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स और मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स को भुगतान जारी कर दिया। यह राशि आरटीजीएस और चेक के माध्यम से खातों में स्थानांतरित की गई। आरोप है कि निर्माण कार्यों के लिए ठेकेदारों की ओर से वैध बिल या वाउचर भी जमा नहीं किए गए थे। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि शासकीय दस्तावेजों में स्मृति कंस्ट्रक्शन के नाम पर दर्ज मोबाइल नंबर तत्कालीन उप अभियंता विवेक प्रताप सिंह राठौर का था। वहीं, ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव ने अपने आधिकारिक बयानों में कथित तौर पर स्वीकार किया कि अधिकारियों के दबाव में उन्होंने निर्माण एजेंसी के रूप में हस्ताक्षर किए थे।

जांच समिति की रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख

विज्ञापन

इस मामले की शिकायत तत्कालीन जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने जिला प्रशासन से की थी। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप मौके पर निर्माण कार्य नहीं कराए गए थे। रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया।

अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपित लोकसेवकों की ओर से भारतीय दंड संहिता की धारा 197 के तहत अभियोजन से मिलने वाले संरक्षण का तर्क दिया गया। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पद का दुरुपयोग कर आपराधिक साजिश रचना और वित्तीय धोखाधड़ी करना किसी सरकारी कर्मचारी के आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने जिलाधिकारी द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच समिति के अधिकारियों के खिलाफ अपराध बनना नहीं माना।

पूर्व सीईओ, उप अभियंताओं और ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश
अदालत के आदेश के अनुसार, तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ सुरेश्वर नाथ तिवारी, उप अभियंता विवेक प्रताप सिंह राठौर, तत्कालीन प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी एवं वर्तमान उप अभियंता उपेंद्र सिंह सेंगर, तत्कालीन लिपिक शैलेंद्र मिश्र, तत्कालीन पंचायत सचिव राम प्रकाश यादव, तत्कालीन सरपंच इम्तान सिंह, व्यवसायी सुयश अग्रवाल और अरविंद कुमार अग्रवाल समेत संबंधित निर्माण फर्मों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

आदेश के तहत आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, शासकीय धनराशि के कथित गबन, वित्तीय धोखाधड़ी और शासकीय अभिलेखों में जालसाजी से संबंधित प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रकरण में यह भी उल्लेख किया गया है कि उप अभियंता विवेक प्रताप सिंह राठौर और उपेंद्र सिंह सेंगर के खिलाफ 28 मार्च, 2025 को अदालत के निर्देश पर एक अन्य भ्रष्टाचार मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें