झारखंड के बहुचर्चित वासेपुर हत्याकांड के फरार दोषी शब्बीर आलम को वर्षों तक शरण देने के आरोप में अंबिकापुर पुलिस ने बस संचालक वैदुल खान पर अपराध दर्ज किया है। वैदुल खान पर आरोप है कि उसने शब्बीर आलम को 13 वर्षों तक संरक्षण दिया, जबकि उसे उसकी दोषसिद्धि की जानकारी थी।
झारखंड के बहुचर्चित वासेपुर हत्याकांड के फरार दोषी शब्बीर आलम को वर्षों तक शरण देने के आरोप में अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने वैदुल खान के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। मोमिनपुरा निवासी वैदुल खान राजहंस बस संचालक है। पुलिस का आरोप है कि उसने शब्बीर आलम को करीब 13 वर्षों तक संरक्षण प्रदान किया।
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पुलिस के अनुसार, वैदुल खान को शब्बीर आलम के फरार होने और हत्या के मामले में दोषसिद्ध होने की जानकारी थी। इसके बावजूद उसने अपने बस व्यवसाय और सिलाई दुकान की आड़ में उसे छिपाए रखा। कुछ दिन पहले धनबाद पुलिस शब्बीर आलम की गिरफ्तारी के लिए अंबिकापुर पहुंची थी।
सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को देखकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई, जिसका फायदा उठाकर शब्बीर आलम मौके से फरार हो गया। सरगुजा पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की है, पर अब तक कोई सुराग नहीं मिला। जांच में पता चला कि शब्बीर आलम वर्ष 2013 से मोमिनपुरा क्षेत्र में रह रहा था। वैदुल खान ने उसे रहने और काम करने की सुविधा उपलब्ध कराई थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद वैदुल खान पर एफआईआर दर्ज की गई है।
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वासेपुर हत्याकांड और शब्बीर आलम
शब्बीर आलम झारखंड के धनबाद स्थित वासेपुर में वर्ष 2001 के दोहरे हत्याकांड का आरोपी है। आरोप है कि कोयला कारोबार में वर्चस्व की लड़ाई के चलते उसने 18 अक्तूबर 2001 को फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून की गोली मारकर हत्या की थी। वर्ष 2013 में गिरफ्तारी के बाद वह अदालत में पेशी के दौरान फरार हो गया था। वर्ष 2018 में झारखंड हाईकोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित करते हुए उसकी संपत्तियों की कुर्की के आदेश दिए थे।
वासेपुर की गैंगवार और कोयला माफिया पर आधारित फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' का निर्माण वर्ष 2012 में फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने किया था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फरार गैंगस्टर शब्बीर आलम को अंबिकापुर में इतने लंबे समय तक किन-किन लोगों का संरक्षण मिलता रहा। यह जांच उसके सहयोगियों का पता लगाने के लिए की जा रही है।